Section 140 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 140 The Trade Marks Act, 1999: 

Power to require information of imported goods bearing false trade marks.—

(1) The proprietor or a licensee of a registered trade mark may give notice in writing to the Collector of Customs to prohibit the importation of any goods if the import of the said goods constitute infringement under clause (c) of sub-section (6) of section 29.

(2) Where goods, which are prohibited to be imported into India by notification of the Central Government under clause (n) of sub-section (2) of section 11 of the Customs Act, 1962 (52 of 1962), for the protection of trade marks, and are liable to confiscation on importation under that Act, are imported into India, the Commissioner of Customs if, upon representation made to him, he has reason to believe that the trade mark complained of is used as a false trade mark, may require the importer of the goods, or his agent, to produce any documents in his possession relating to the goods and to furnish information as to the name and address of the person by whom the goods were consigned to India and the name and address of the person to whom the goods were sent in India.

(3) The importer or his agent shall, within fourteen days, comply with the requirement as aforesaid, and if he fails to do so, he shall be punishable with fine which may extend to five hundred rupees.

(4) Any information obtained from the importer of the goods or his agent under this section may be communicated by the Commissioner of Customs to the registered proprietor or registered user of the trade mark which is alleged to have been used as a false trade mark.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 140 The Trade Marks Act, 1999: 

Vidya Bhushan Jain vs Collector Of Customs on 17 March, 2006

M/S.Pathanjali Ayurved Limited vs Arudra Engineers Private Limited on 6 August, 2020




व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 140 का विवरण : 

मिथ्या व्यापार चिह्न वाले आयातित माल की जानकारी की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का स्वत्वधारी या अनुज्ञप्ितधारी सीमाशुल्क कलक्टर को किसी माल के आयात का प्रतिषेध करने के लिए लिखित रूप में सूचना उस दशा में दे सकेगा यदि उक्त माल के आयात से धारा 29 की उपधारा (6) के खंड (ग) के अधीन अतिलंघन होता है ।

(2) जहां माल, जिनका व्यापार चिह्नों के संरक्षण के लिए भारत में आयात किया जाना, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 की उपधारा (2) के खंड (ढ) के अधीन केन्द्रीय सरकार की अधिसूचना द्वारा प्रतिषिद्ध है और जो आयात पर उस अधिनियम के अधीन अधिहृत किए जाने के लिए दायी हैं, भारत में आयात किए जाते हैं, वहां सीमाशुल्क आयुक्त, यदि उसे अभ्यावेदन करने पर उसके पास विश्वास करने का कारण है कि परिवादित व्यापार चिह्न मिथ्या व्यापार चिह्न के रूप में उपयोग किया गया है, उस माल के आयातकर्ता या उसके अभिकर्ता से माल से संबंधित दस्तावेज जो उसके कब्जे में हैं, पेश करने की और उस व्यक्ति के नाम और पते की जानकारी देने की, जिसने माल भारत को प्रेषित किया था और उस व्यक्ति के नाम और पते की जानकारी देने की जिसको माल भारत में भेजा गया था, अपेक्षा कर सकेगा ।

(3) आयातकर्ता या उसका अभिकर्ता, चौदह दिन के भीतर यथापूर्वोक्त अपेक्षा का अनुपालन करेगा और यदि वह ऐसा करने असफल रहेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(4) इस धारा के अधीन माल के आयातकर्ता या उसके अभिकर्ता से अभिप्राप्त कोई जानकारी सीमाशुल्क आयुक्त द्वारा उस व्यापार चिह्न के, जिसका मिथ्या व्यापार चिह्न के रूप में उपयोग अभिकथित है, रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत उपयोगकर्ता को संसूचित की जा सकेगी ।



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