Section 14 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 


Section 14  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Failure or impossibility to act.—

(1) The mandate of an arbitrator shall terminate if—

(a) he becomes de jure or de facto unable to perform his functions or for other reasons fails to act without undue delay; and

(b) he withdraws from his office or the parties agree to the termination of his mandate.

(2) If a controversy remains concerning any of the grounds referred to inclause (a) of sub-section (1), a party may, unless otherwise agreed by the parties, apply to the Court to decide on the termination of the mandate.

(3) If, under this section or sub-section (3) of section 13, an arbitrator withdraws from his office or a party agrees to the termination of the mandate of an arbitrator, it shall not imply acceptance of the validity of any ground referred to in this section or sub-section (3) of section 12.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 14  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

N.B.C.C.Ltd vs J.G.Engineering Pvt.Ltd on 5 January, 2010

Tata Consultancy Services  vs Vishal Ghisulal Jain on 23 November, 2021

Bharat Broadband Network Limited vs United Telecoms Limited on 16 April, 2019

Shailesh Dhairyawan vs Mohan Balkrishna Lulla on 16 October, 2015

M/S. Canara Nidhi Limited vs M. Shashikala on 23 September, 2019

Denel (Proprrietory Limited) vs Govt.Of India Min.Of Defence on 9 January, 2012




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 14 का विवरण : 

कार्य करने में असफलता या असंभवता-(1) किसी मध्यस्थ का आदेश पर्यवसित हो जाएगा, यदि वह-

(क) विधितः या वस्तुतः अपने कृत्यों का पालन करने में असफल हो जाता है या अन्य कारणों से असम्यक् विलम्ब के बिना कार्य करने में असफल रहता है, और

(ख) अपने पद से हट जाता है या पक्षकार उसके आदेश की समाप्ति के लिए करार कर लेते हैं ।

(2) यदि उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट आधारों में से किसी से संबंधित कोई विवाद शेष रहता है तो कोई पक्षकार, जब तक कि पक्षकारों द्वारा अन्यथा करार न किया गया हो, न्यायालय को आदेश की समाप्ति पर विनिश्चय करने के लिए आवेदन कर   सकेगा ।

(3) यदि इस धारा या धारा 13 की उपधारा (3) के अधीन कोई मध्यस्थ अपने पद से हट जाता है या कोई पक्षकार किसी मध्यस्थ के आदेश की समाप्ति के लिए सहमत हो जाता है तो उसमें इस धारा या धारा 12 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी आधार की विधिमान्यता की स्वीकृति अंतर्हित नहीं होगी ।



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