Section 125 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 125 The Trade Marks Act, 1999: 

Application for rectification of register to be made to Appellate Board in certain cases.—

(1) Where in a suit for infringement of a registered trade mark the validity of the registration of the plaintiff’s trade mark is questioned by the defendant or where in any such suit the defendant raises a defence under clause (e) of sub-section (2) of section 30 and the plaintiff questions the validity of the registration of the defendant’s trade mark, the issue as to the validity of the registration of the trade mark concerned shall be determined only on an application for the rectification of the register and, notwithstanding anything contained in section 47 or section 57, such application shall be made to the Appellate Board and not to the Registrar.

(2) Subject to the provisions of sub-section (1), where an application for rectification of the register is made to the Registrar under section 47 or section 57, the Registrar may, if he thinks fit, refer the application at any stage of the proceedings to the Appellate Board.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 125 The Trade Marks Act, 1999: 

Jagatjit Industries Limited vs The Intelectual Prop Appellate on 20 January, 2016

Patel Field Marshal Agencies And vs P.M Diesels Ltd. And Ors. on 29 November, 2017



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 125 का विवरण : 

कतिपय मामलों में रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन अपील बोर्ड को किया जाना-(1) जहां रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न के अतिलंघन के लिए वाद में वादी के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता को प्रतिवादी द्वारा प्रश्नगत किया गया है या जहां ऐसे किसी वाद में प्रतिवादी ने धारा 30 की उपधारा (2) के खण्ड (ङ) के अधीन प्रतिवाद किया है और वादी प्रतिवादी के व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता को प्रश्नगत करता है, वहां संबद्ध व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण की विधिमान्यता के बारे में, विवाद्यक रजिस्टर के परिशोधन के लिए आवेदन पर ही अवधारित किया जाएगा और धारा 47 या धारा 57 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा आवेदन अपील बोर्ड को किया जाएगा, न कि रजिस्ट्रार को ।


(2) जहां, उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्टर के परिशोधन के लिए कोई आवेदन धारा 47 या धारा 57 के अधीन रजिस्ट्रार को किया जाता है, वहां यदि रजिस्ट्रार ठीक समझे तो, वह कार्यवाहियों के किसी भी प्रकम पर आवेदन को अपील बोर्ड को निर्दिष्ट कर सकेगा ।



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