Section 112 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 112 The Trade Marks Act, 1999: 

Exemption of certain persons employed in ordinary course of business.—Where a person accused of an offence under section 103 proves—

(a) that in the ordinary course of his business he is employed on behalf of other persons to apply trade marks or trade descriptions, or as the case may be, to make dies, blocks, machines, plates, or other instruments for making, or being used in making, trade marks; and

(b) that in the case which is the subject of the charge he was so employed, and was not interested in the goods or other thing by way of profit or commission dependent on the sale of such goods or providing of services, as the case may be; and

(c) that, having taken all reasonable precautions against committing the offence charged, he had, at the time of the commission of the alleged offence, no reason to suspect the genuineness of the trade mark or trade description; and

(d) that, on demand made by or on behalf of the prosecutor, he gave all the information in his power with respect to the persons on whose behalf the trade mark or trade description was applied, he shall be acquitted.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 112 The Trade Marks Act, 1999: 

Vishnudas Trading As Vishnudas vs The Vazir Sultan Tobaccoco. Ltd. on 9 July, 1996



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 112 का विवरण : 

कारबार के सामान्य अनुक्रम में नियोजित कतिपय व्यक्तियों को छूट-जहां धारा 103 के अधीन अपराध के लिए अभियुक्त कोई व्यक्ति यह साबित करता है कि-

(क) वह अपने कारबार के सामान्य अनुक्रम में अन्य व्यक्तियों की ओर से व्यापार चिह्न या पण्य विवरण लगाने के लिए, या, यथास्थिति, व्यापार चिह्न बनाने में या बनाने में उपयोग के लिए डाई, ब्लाक, मशीन, पट्टी या अन्य उपकरण बनाने के लिए नियोजित है; और

(ख) वह, उस मामले में जो आरोप का विषय है इस प्रकार नियोजित था और माल या अन्य वस्तुओं में, यथास्थिति, ऐसे माल के विक्रय या सेवाएं प्रदान करने पर आधारित लाभ या कमीशन में हितबद्ध नहीं था; और

(ग) आरोपित अपराध के करने के विरुद्ध सभी युक्तियुक्त पूर्वावधानियां बरतने के पश्चात् उसके पास अभिकथित अपराध के किए जाने के समय व्यापार चिह्न या पण्य विवरण के असली होने पर संदेह करने का कोई कारण नहीं था; और

(घ) अभियोजक द्वारा या उसकी ओर से मांग करने पर उसने उन व्यक्तियों की बाबत, जिनकी ओर से व्यापार चिह्न या पण्य विवरण लगाया गया था, वह सब जानकारी दी जो उसकी शक्ति में थी,

वहां वह दोषमुक्त कर दिया जाएगा ।



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