Section 111 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 111 The Trade Marks Act, 1999: 

Forfeiture of goods.—

(1) Where a person is convicted of an offence under section 103 or section 104 or section 105 or is acquitted of an offence under section 103 or section 104 on proof that he acted without intent to defraud, or under section 104 on proof of the matters specified in clause

(a) , clause (b) or clause (c) of that section, the court convicting or acquitting him may direct the forfeiture to Government of all goods and things by means of, or in relation to, which the offence has been committed, or but for such proof as aforesaid would have been committed.

(2) When a forfeiture is directed on a conviction and an appeal lies against the conviction, an appeal shall lie against the forfeiture also.

(3) When a forfeiture is directed on acquittal and the goods or things to which the direction relates are of value exceeding fifty rupees, an appeal against the forfeiture may be preferred, within thirty days from the date of the direction, to the court to which in appealable cases appeals lie from sentences of the court which directed the forfeiture.

(4) When a forfeiture is directed on a conviction, the court, before whom the person is convicted, may order any forfeited articles to be destroyed or otherwise disposed of as the court thinks fit.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 111 The Trade Marks Act, 1999: 


Patel Field Marshal Agencies And vs P.M Diesels Ltd. And Ors. on 29 November, 2017

M/S S.M. Dyechem Ltd vs M/S Cadbury (India) Ltd on 9 May, 2000

M/S S.M. Dyechem Ltd vs M/S Cadbury (India) Ltd on 9 May, 2000

Whirlpool Corporation vs Registrar Of Trade Marks, Mumbai & on 26 October, 1998

Whirlpool Corporation vs Registrar Of Trade Marks, Mumbai & on 26 October, 1998

National Bell Co. & Anr vs Metal Goods Mfg. Co. (P) Ltd. & Anr on 18 March, 1970

Bhavanesh Mohanlal Amin And Anr vs Nirma Chemicals Works And Anr on 7 November, 2005




व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 111 का विवरण : 

माल का सपमहरण-(1) जहां कोई व्यक्ति धारा 103 या धारा 104 या धारा 105 के अधीन किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, या धारा 103 या धारा 104 के अधीन अपराध से, यह साबित करने पर कि उसने कपट के आशय के बिना कार्य किया था, या धारा 104 के अधीन उस धारा के खंड (क), खंड (ख) या खंड (ग) में विनिर्दिष्ट मामलों के साबित करने पर दोषमुक्त किया गया है, वहां उसे सिद्धदोष या दोषमुक्त करने वाला न्यायालय सरकार को उन सब माल और वस्तुओं के समपहरण किए जाने का निदेश दे सकेगा जिनके माध्यम से या जिनके संबंध में अपराध किया गया है या यदि पूर्वोक्त सबूत न होता तो किया गया होता ।

(2) जहां दोषसिद्धि पर समपहरण का निदेश दिया जाता है और ऐसी दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील होती है, वहां समपहरण के विरुद्ध भी अपील होगी ।

(3) जहां दोषमुक्ति पर समपहरण का निदेश दिया जाता है और वह माल या वे वस्तुएं जिनसे निदेश संबंधित है, पचास रुपए से अधिक मूल्य की है, वहां समपहरण के विरुद्ध अपील निदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, उस न्यायालय को की जा सकेगी जिसमें अपीली मामलों में समपहरण का निदेश देने वाले न्यायालय के दंडादेशों से अपील की जाती है ।

(4) जहां दोषसिद्धि पर समपहरण का निदेश दिया जाता है, वहां वह न्यायालय जिसके समक्ष वह व्यक्ति सिद्धदोष है, किन्हीं समपहृत वस्तुओं को नष्ट करने या उनका अन्यथा व्ययन करने का, जैसा न्यायालय ठीक समझे, आदेश दे सकेगा ।



To download this dhara / Section of  The Trade Marks Act, 1999 in pdf format use chrome web browser and use keys [Ctrl + P] and save as pdf.

Comments

Popular posts from this blog

100 Questions on Indian Constitution for UPSC 2020 Pre Exam

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

भारतीय संविधान से संबंधित 100 महत्वपूर्ण प्रश्न उतर