Section 104 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 104 The Trade Marks Act, 1999: 

Penalty for selling goods or providing services to which false trade mark or false trade description is applied.—Any person who sells, lets for hire or exposes for sale, or hires or has in his possession for sale, goods or things, or provides or hires services, to which any false trade mark or false trade description is applied or which, being required under section 139 to have applied to them an indication of the country or place in which they were made or produced or the name and address of the manufacturer, or person for whom the goods are manufactured or services provided, as the case may be, are without the indications so required, shall, unless he proves,—

(a) that, having taken all reasonable precautions against committing an offence against this section, he had at the time of commission of the alleged offence no reason to suspect the genuineness of the trade mark or trade description or that any offence had been committed in respect of the goods or services; or

(b) that, on demand by or on behalf of the prosecutor, he gave all the information in his power with respect to the person from whom he obtained such goods or things or services; or

(c) that otherwise he had acted innocently, be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to three years and with fine which shall not be less than fifty thousand rupees but which may extend to two lakh rupees: Provided that the court may, for adequate and special reasons to be mentioned in the judgment, impose a sentence of imprisonment for a term of less than six months or a fine of less than fifty thousand rupees.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 104 The Trade Marks Act, 1999: 

Nasik Hing Supplying Company vs Annapurna Gruh Udyog Bhandar on 4 March, 2003

Shivlal vs State & Anr on 16 May, 2013

The Employees' State Insurance vs Shanmugha Theatres And Ors. on 20 June, 1997

Super Candles And Anr. vs Mahabir Candle Works And Anr. on 12 June, 1996

Vinod Kumar Proprietor Of Kunal vs State (Nct Of Delhi) & Ors. on 22 September, 2020



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 104 का विवरण : ऐसे माल का विक्रय या ऐसी सेवाएं प्रदान करने के लिए शास्ति जिस पर मिथ्या व्यापार चिह्न या मिथ्या पण्य विवरण लगाया गया है-कोई व्यक्ति जो किसी ऐसे माल या वस्तुओं का विक्रय करेगा, भाड़े पर देगा या विक्रय या भाड़े के लिए अभिदर्शित करेगा या विक्रय के लिए अपने कब्जे में रखेगा या ऐसी सेवाएं प्रदान करेगा या उन्हें भाड़े पर देगा, जिन पर कोई मिथ्या व्यापार चिह्न या मिथ्या पण्य विवरण लगाया गया है या जिन पर उनके बनाए जाने या उत्पादन के देश या स्थान का या उस विनिर्माता, या उस व्यक्ति का, जिसके लिए, यथास्थिति, माल विनिर्मित किया गया है या सेवाएं प्रदान की गई हैं, नाम और पते का उपदर्शन धारा 139 के अधीन लगाने की अपेक्षा है, ऐसे अपेक्षित उपदर्शन के बिना है, जब तक वह यह साबित न कर दे कि :-

(क) इस धारा के विरुद्ध अपराध करने के संबंध में सभी युक्तियुक्त पूर्वोपाय कर लेने के पश्चात् उसके पास अधिकथित अपराध के किए जाने के समय व्यापार चिह्न या पण्य विवरण के असलीपन पर या उस माल या उन सेवाओं की बाबत कोई अपराध किया गया है, यह संदेह करने का कारण नहीं था; या

(ख) अभियोजक द्वारा या उसकी ओर से मांग किए जाने पर उस व्यक्ति की बाबत, जिससे कि उसने वे माल या वस्तुएं या सेवाएं अभिप्राप्त की थीं, वह सब जानकारी दी जो उसकी शक्ित में थी; या(ग) उसने अन्यथा निर्दोष रूप से कार्य किया था,

कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:

परन्तु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से, जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएं, छह मास से कम अवधि तक के कारावास का दंडादेश या पचास हजार रुपए से कम का जुर्माना, अधिरोपित कर सकेगा ।



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