Section 103 The Trade Marks Act, 1999:

 


Section 103 The Trade Marks Act, 1999: 


Penalty for applying false trade marks, trade descriptions, etc.—Any person who—

(a) falsifies any trade mark; or

(b) falsely applies to goods or services any trade mark; or

(c) makes, disposes of, or has in his possession, any die, block, machine, plate or other instrument for the purpose of falsifying or of being used for falsifying, a trade mark; or

(d) applies any false trade description to goods or services; or

(e) applies to any goods to which an indication of the country or place in which they were made or produced or the name and address of the manufacturer or person for whom the goods are manufactured is required to be applied under section 139, a false indication of such country, place, name or address; or

(f) tampers with, alters or effaces an indication of origin which has been applied to any goods to which it is required to be applied under section 139; or

(g) causes any of the things above-mentioned in this section to be done, shall, unless he proves that he acted, without intent to defraud, be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to three years and with fine which shall not be less than fifty thousand rupees but which may extend to two lakh rupees: Provided that the court may, for adequate and special reasons to be mentioned in the judgment, impose a sentence of imprisonment for a term of less than six months or a fine of less than fifty thousand rupees.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section  103 The Trade Marks Act, 1999: 

Shivlal vs State & Anr on 16 May, 2013

Prateek Chandragupt Goyal vs The State Of Maharashtra And Anr on 20 April, 2021

Piyush Subhashbhai Ranipa vs The State Of Maharashtra on 26 February, 2021

M. P. Singh & Ors. vs M/S Natural Spirits & Ors. on 1 September, 2017

Vinod Kumar Proprietor Of Kunal vs State (Nct Of Delhi) & Ors. on 22 September, 2020



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा  103 का विवरण : 

मिथ्या व्यापार चिह्न, पण्य विवरण, आदि लगाने के लिए शास्ति-कोई व्यक्ति जो-

(क) किसी व्यापार चिह्न का मिथ्याकरण करेगा; या

(ख) माल या सेवाओं पर किसी व्यापार चिह्न को मिथ्या रूप से लगाएगा; या

(ग) किसी व्यापार चिह्न के मिथ्याकरण या मिथ्याकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन के लिए कोई डाई, ब्लाक, मशीन, पट्टी या अन्य उपकरण बनाएगा, व्ययन करेगा या अपने कब्जे में रखेगा; या

(घ) माल या सेवाओं पर किसी मिथ्या व्यापार विवरण को लगाएगा; या

(ङ) किसी ऐसे माल पर जिस पर धारा 139 के अधीन उस देश या स्थान का, जहां वह बनाया गया या उत्पादित किया गया था या जिस विनिर्माता या व्यक्ति के लिए माल विनिर्मित किया गया है, उसके नाम और पते का उपदर्शन लगाने की अपेक्षा है, ऐसे देश, स्थान, नाम या पते का मिथ्या उपदर्शन लगाएगा; या

(च) किसी ऐसे उद्गम संबंधी उपदर्शन को जिसे उस माल पर लगाया गया है जिस पर इसके लगाए जाने की धारा 139 के अधीन अपेक्षा है, बिगाड़ेगा, परिवर्तित करेगा या मिटाएगा; या

(छ) इस धारा में ऊपर उल्लिखित किन्हीं बातों को कराएगा,

जब तक वह यह साबित न कर दे कि उसने कपट के आशय के बिना कार्य किया था, कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:

 परन्तु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से, जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएं, छह मास से कम अवधि तक के कारावास का दंडादेश या पचास हजार रुपए से कम का जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा ।



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