Section 102 The Trade Marks Act, 1999

 

Section 102 The Trade Marks Act, 1999: 

Falsifying and falsely applying trade marks.—

(1) A person shall be deemed to falsify a trade mark who, either,—

(a) without the assent of the proprietor of the trade mark makes that trade mark or a deceptively similar mark; or

(b) falsifies any genuine trade mark, whether by alteration, addition, effacement or otherwise.

(2) A person shall be deemed to falsely apply to goods or services a trade mark who, without the assent of the proprietor of the trade mark,—

(a) applies such trade mark or a deceptively similar mark to goods or services or any package containing goods;

(b) uses any package bearing a mark which is identical with or deceptively similar to the trade mark of such proprietor, for the purpose of packing, filling or wrapping therein any goods other than the genuine goods of the proprietor of the trade mark.

(3) Any trade mark falsified as mentioned in sub-section (1) or falsely applied as mentioned in sub-section (2), is in this Act referred to as a false trade mark.

(4) In any prosecution for falsifying a trade mark or falsely applying a trade mark to goods or services, the burden of proving the assent of the proprietor shall lie on the accused.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 102 The Trade Marks Act, 1999: 

Prateek Chandragupt Goyal vs The State Of Maharashtra And Anr on 20 April, 2021

K.Vasudevan vs . The Inspector Of Police & Another on 21 January, 2020

Mr Mayank Khanduja vs State Of Karnataka on 20 July, 2021

M/S Givo Limited vs Arun Singhal on 19 January, 2015

Suresh Kumar vs State Of Punjab And Another on 15 December, 2009



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 102 का विवरण : 

व्यापार चिह्नों का मिथ्याकरण और उन्हें मिथ्या रूप में लगाना-(1) कोई व्यक्ति किसी व्यापार चिह्न को मिथ्याकृत करने वाला समझा जाएगा जो या तो-

(क) व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी की अनुमति के बिना उस व्यापार चिह्न को बनाता है या इतना समरूप व्यापार चिह्न बनाता है कि धोखा हो जाए; या

(ख) किसी असली व्यापार चिह्न को चाहे परिवर्तन करके, परिवर्धन करके, मिटाकर या अन्यथा मिथ्याकृत करता है 

(2) कोई व्यक्ति किसी व्यापार चिह्न को माल या सेवाओं पर मिथ्या रूप से लगाने वाला समझा जाएगा जो व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी की अनुमति के बिना-

(क) ऐसे व्यापार चिह्न को या तो इतने समरूप चिह्न को कि जिससे धोखा हो जाए, माल या सेवाओं या किसी ऐसे पैकेज पर, जिसमें माल है, लगाता है;

(ख) ऐसे स्वत्वधारी के व्यापार चिह्न से तद्रूप या इतने समरूप चिह्न वाले कि धोखा हो जाए, किसी पैकेज या उपयोग व्यापार चिह्न के स्वत्वधारी के असली माल से भिन्न किसी माल को उसमें पैक करने, भरने या लपेटने के प्रयोजन के लिए करता है ।

(3) उस व्यापार चिह्न को जो उपधारा (1) में यथाउल्लिखित मिथ्याकृत है या उपधारा (2) में यथाउल्लिखित मिथ्या रूप से लगाया गया है, इस अधिनियम में मिथ्या व्यापार चिह्न के रूप में निर्दिष्ट किया गया है ।

(4) व्यापार चिह्न के मिथ्याकरण के लिए या माल या सेवाओं पर व्यापार चिह्न मिथ्या रूप से लगाने के लिए किसी अभियोजन में स्वत्वधारी की अनुमति साबित करने का भार अभियुक्त पर होगा ।



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