Section 350 IPC in Hindi and English

 Section 350 IPC in Hindi and English


Section 350 of IPC 1860:- Criminal force -

Whoever intentionally uses force to any person, without that person's consent, in order to the committing of any offence, or intending by the use of such force to cause, or knowing it to be likely that by the use of such force he will cause injury, fear or annoyance to the person to whom the force is used, is said to use criminal force to that other.

Illustrations -

(a) Z is sitting in a moored boat on a river. A unfastens the moorings, and thus intentionally causes the boat to drift down the stream. Here A intentionally causes motion to Z, and he does this by disposing substances in such a manner that the motion is produced without any other act on any person's part. A has, therefore, intentionally used force to Z, and if he has done so without Z's consent, in order to the committing of any offence, or intending or knowing it to be likely that this use of force will cause injury, fear or annoyance to Z, A has used criminal force to Z.

(b) Z is riding in a chariot. A lashes Z's horses, and thereby causes them to quicken their pace. Here Z has caused change of motion to Z by inducing the animals to change their motion. A has therefore used force to Z; and if A has done this without Z's consent, intending or knowing it to be likely that he may thereby injure, frighten or annoy Z, A has used criminal force to Z.

(c) Z is riding in a palanquin. A, intending to rob Z, seizes the pole and stops the palanquin. Here A has caused cessation of motion to Z, and he has done this by his own bodily power. A has therefore used force to Z, and as A has acted thus intentionally, without Z's consent, in order to the commission of an offence. A has used criminal force to Z.

(d) A intentionally pushes against Z in the street. Here A has by his own bodily power moved his own person so as to bring it into contact with Z. He has, therefore, intentionally used force to Z, and if he has done so without Z's consent, intending or knowing it to be likely that he may thereby injure, frighten or annoy Z, he has used criminal force to Z.

(e) A throws a stone, intending or knowing it to be likely that the stone will be thus brought into contact with Z, or with Z's clothes, or with something carried by Z, or that it will strike water and dash up the water against Z's clothes or something carried by Z. Here, if the throwing of the stone produce the effect of causing any substance to come into contact with Z, or Z's clothes. A has used force to Z; and if he did so without Z's consent, intending thereby to injure, frighten or annoy Z, he has used criminal force to Z.

(f) A intentionally pulls up a woman's veil. Here A intentionally uses force to her, and if he does so without her consent intending or knowing it to be likely that he may thereby injure, frighten or annoy her, he has used criminal force to her.

(g) Z is bathing, A pours into the bathwater which he knows to be boiling. Here A intentionally by his own bodily power causes such motion in the boiling water as brings that water into contact with Z, or with other water so situated that such contact must affect Z's sense of feeling; A has therefore intentionally used force to Z, and if he has done this without Z's consent intending or knowing it to be likely that he may thereby cause injury, fear, or annoyance to Z, A has used criminal force.

(h) A incites a dog to spring upon Z, without Z's consent. Here, if A intends to cause injury, fear or annoyance to Z, he uses criminal force to Z.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 350 of Indian Penal Code 1860:



आईपीसी, 1860 (भारतीय दंड संहिता) की धारा 350 का विवरण - आपराधिक बल -

जो कोई किसी व्यक्ति पर उस व्यक्ति की सम्मति के बिना बल का प्रयोग किसी अपराध को करने के लिए या उस व्यक्ति को, जिस पर बल का प्रयोग किया जाता है, क्षति, भय या क्षोभ, ऐसे बल के प्रयोग से कारित करने के आशय से, या ऐसे बल के प्रयोग से संभाव्यतः कारित करेगा यह जानते हुए साशय करता है, वह उस अन्य व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करता है, यह कहा जाता है।

दृष्टांत -

(क) य नदी के किनारे रस्सी से बंधी हुई नाव पर बैठा है। क रस्सियों को उबंधित करता है और उस प्रकार नाव को धार में साशय बहा देता है। वहां क, य को साशय गतिमान करता है, और वह ऐसा उन पदार्थों को ऐसी रीति से व्ययनित करके करता है कि किसी व्यक्ति की ओर से कोई अन्य कार्य किए बिना ही गति उत्पन्न हो जाती है। अतएव, क ने य पर बल का प्रयोग साशय किया है, और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य कोई अपराध करने के लिए, या यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए किया है कि ऐसे बल के प्रयोग से वह य को क्षति, भय या क्षोभ कारित करे, तो क ने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ख) य एक रथ में सवार होकर चल रहा है। क, य के घोड़ों को चाबुक मारता है, और उसके द्वारा उनकी चाल को तेज कर देता है। यहां क ने जीवजन्तुओं को उनकी अपनी गति परिवर्तित करने के लिए उत्प्रेरित करके य का गति परिवर्तन कर दिया है। अतएव, क ने य पर बल का प्रयोग किया है, और यदि क ने य की सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए किया है कि वह उससे य को क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करे तो क ने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ग) य एक पालकी में सवार होकर चल रहा है। य को लूटने का आशय रखते हुए क पालकी का डंडा पकड़ लेता है, और पालकी को रोक देता है। यहां, क ने य को गतिहीन किया है, और यह उसने अपनी शारीरिक शक्ति द्वारा किया है। अतएव क ने य पर बल का प्रयोग किया है, और क ने य की सम्मति के बिना यह कार्य अपराध करने के लिए साशय किया है, इसलिए क ने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(घ)  क सड़क पर साशय य को धक्का देता है। यहां क ने अपनी निजी शारीरिक शक्ति द्वारा अपने शरीर को इस प्रकार गति दी है कि वह य के संस्पर्श में आए अतएव उसने साशय य पर बल का प्रयोग किया है, और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए किया है कि वह उससे य को क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करे, तो उसने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ङ) क यह आशय रखते हुए या यह बात संभाव्य जानते हुए एक पत्थर फेंकता है कि वह पत्थर इस प्रकार य, या य के वस्त्र के या य द्वारा ले जाई जाने वाली किसी वस्तु के संस्पर्श में आएगा या कि वह पानी में गिरेगा और उछलकर पानी य के कपड़ों पर या य द्वारा ले जाई जाने वाली किसी वस्तु पर जा पड़ेगा। यहां, यदि पत्थर के फेंके जाने से यह परिणाम उत्पन्न हो जाए कि कोई पदार्थ य, या य के वस्त्रों के संस्पर्श में आ जाए तो क ने य पर बल का प्रयोग किया है; और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य उसके द्वारा य को क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करने का आशय रखते हुए किया है, तो उसने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(च) क किसी स्त्री का घूंघट साशय हटा देता है। यहां क ने उस पर साशय बल का प्रयोग किया है, और यदि उसने उस स्त्री की सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए किया है कि उससे उसको क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न हो, तो उसने उस पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(छ) य स्नान कर रहा है। क स्नान करने के टब में ऐसा जल डाल देता है जिसे वह जानता है कि वह उबल रहा है। यहां, क उबलते हुए जल में ऐसी गति को अपनी शारीरिक शक्ति द्वारा साशय उत्पन्न करता है कि उस जल का संस्पर्श य से होता है या अन्य जल से होता है, जो इस प्रकार स्थित है कि ऐसे संस्पर्श से य की संवेदन शक्ति प्रभावित होती है; इसलिए क ने य पर साशय बल का प्रयोग किया है, और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए किया है कि वह उससे य को क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करे, तो क ने आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ज) क, य की सम्मति के बिना, एक कुत्ते को य पर झपटने के लिए भड़काता है। यहाँ यदि क का आशय य को क्षति, भय या क्षोभ कारित करने का है, तो उसने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।



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