पुरुष तथा महिलाओं को समान वेतन सुनिश्चित करने के क्या प्रावधान है?

प्रश्न : पुरुष तथा महिलाओं को समान वेतन सुनिश्चित करने के क्या  विविध  प्रावधान है? 

उत्तर : संवैधानिक प्रावधानों को अमल मैं लाने के लिए संसद ने 1976 मैं समान   परिश्रमिक अधिनियम बनाया| इस अधिनियम की धारा 4 के अनुसार किसी भी कर्मचारी को किसी संस्था या नौकरी में लिंग के आधार पर दूसरे कर्मचारी से कम वेतन नहीं दिया जा सकता यदि व समान काम या एक जैसे तरीके के काम करें| धारा 5 कहती है कि कोई भी  नियोजक( मालिक) सम्मान काम या एक जैसी पक्की के कामों में कर्मचारियों की भर्ती करते समय महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं कर सकता| परंतु यह बात उन रोजगारों पर ऊपर लागू नहीं होती जिनमें महिलाओं को काम करने के लिए कानून द्वारा मना किया गया है| इसके अलावा यह बात अनुसूचित जाति जन जाति',भूत- पूर्व कर्मचारी निकाल दिए गए कर्मचारियों या कोई अन्य वर्ग या श्रेणी के व्यक्तियों की भर्ती के संबंध में लागू नहीं होती है| 

प्रश्न : क्या कानून महिलाओं के पक्ष में विशेष प्रबंध करता है?  

उत्तर: जी हां| न्यायालयों ने महिलाओं के पक्ष में बनाए गए विशेष प्रबंधन का संविधान के अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत समर्थन किया है| उच्चतम न्यायालय ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम बीपी प्रभाकरण के केस में यह निर्धारित किया है कि कुछ पदों पर केवल महिलाओं के लिए आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत मान्य है| इसी तरह न्यायालय ने यह भी निर्धारित किया है कि कोई भी नियम जो कि लड़कियों के विश्वविद्यालयों में महिलाओं को प्रिंसिपल अध्यापक ,अध्यापिका, महिला  सुपरिटेंडेंट के पदों पर  विरिष्ठता देता है    वह अनुच्छेद 14` 16` का उल्लंघन नहीं है| यह भी कहा गया की राज्य द्वारा अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत लिए गए निर्णय के बारे में न्यायालय अपील नहीं देख सकते|

उदाहरण:
वन स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 36 केवल महिलाओं( मुकदमे क विचाराधीन के समय) को ही भरण_ पोषण का अधिकार देती है| इसकी बैधता न्यायालय द्वारा भी अनुमोदित की गई|
2. महिलाओं को पर गमन की सजा से छूट है| अपवाद की वैधता को न्यायालय ने भी अनुमोदित किया है| 
3. दंड प्रक्रिया संहिता मैं ऐसे उपलब्ध है जो कि महिलाओं को जमानत पर छूटने की विशेष अधिकार देते हैं इनकी वैधता को न्यायालय द्वारा भी अनुमोदित  किया गया है
4. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत परिवार की महिला सदस्य को सम्मान तामिल नहीं किया जा सकता है| इसको न्यायालय द्वारा वैध ठहराया गया|
5. स्थानीय निकायों में महिलाओं की सीटों के आरक्षण को भी वैध घोषित किया गया है|
6. इसी तरह शैक्षिक संस्थाओं में भी महिलाओं के आरक्षण को अनुमोदित किया गया|
7. भारतीय दंड संहिता के आधार 354 केवल महिलाओं के प्रति अशोभनीय आक्रमण को  दंडनीय घोषित  करती है| इस उपलब्ध को उचित वर्गीकरण के आधार पर वैध ठहराया गया|
8. भारतीय संविधान में भाग 9 पंचायतों में महिलाओं के पक्ष में1/3 सीटों को आरक्षित करता है|
9. लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट मैं ऐसे प्रावधान है जो महिलाओं को मुफ्त मैं कानूनी सहायता देते हैं चाहे वह किसी भी अवस्था में हो|
 10. राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन महिलाओं के शिकायतें तथा उनकी परेशानियों को एक वर्ग के रूप में सुनने के लिए किया गया| यह उत्पीड़न चाहे सरकारी निकायों द्वारा किया गया हो या किसी अन्य व्यक्तियों द्वारा किया गया हो  या किसी अन्य व्यक्तियों द्वारा किया गया हो|

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