ऐसी स्थिति में क्या होता है जब मुकदमों के दौरान ही वादी अथवा प्रतिवादी की मौत हो जाती है

 पक्षों की मौत

प्रश्न :- ऐसी स्थिति में क्या होता है जब मुकदमों के दौरान ही वादी अथवा प्रतिवादी की मौत हो जाती है ? 

उत्तर :- यदि किसी पक्ष की मृत्यु का निर्णय होने से पूर्वी ही हो जाता है तो उसे कानूनी प्रतिनिधि को चाहिए कि निश्चित अवधि के भीतर उसे दस्तावेज में लाए | अन्यथा यह मुकदमा उस पक्ष के संदर्भ में खारिज किया जाता है | अंततः पक्षों की मृत्यु होने की एक निश्चित समय के भीतर न्यायालय को यह सूचना देनी चाहिए कि मृतक के उत्तराधिकारी या कानूनी प्रतिनिधि अब इस मुकदमे को देगा |

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