What are the main features of Federal Constitution in Hindi

परिसंघ संविधान में साधारणतया निम्नलिखित 5 लक्षण होते हैं / Main Features of Federal Constitution

1.द्वैध सरकार और शक्तियों का वितरण
भारत सरकार का अर्थ है दो सरकारों का होना| एकिक राज्य में जैसा की नाम से प्रकट होता है एक ही सरकार होती है -राष्ट्रीय सरकार| परिसंघ में दो सरकारें एक साथ विद्यमान होती हैं| एक तो राष्ट्रीय सरकार और दूसरे प्रत्येक संघटन राज्य कि सरकार| यह दोनों सरकारें अपनी शक्तियां एक ही स्रोत से प्राप्त करती हैं| यह सरकारी एक दूसरे से नहीं किंतु संविधान द्वारा नियंत्रित होती है| यह उप धारणा नहीं की जानी चाहिए कि वे एक दूसरे का स्पर्श नहीं करती| यह एक ही जन पर शासन करती हैं और उनका उद्देश्य एक ही जनता की सेवा करना है| इसीलिए यह स्वाभाविक ही है कि उनके कृत्य एक दूसरे का स्पर्श करें और एक दूसरे को प्रभावित करें| वे कांत में कार्य नहीं कर सकती यह आवश्यक है कि वह एक दूसरे के साथ सक्रिय सहयोग करते हुए कार्य करें|
इस संदर्भ में दो बातें ध्यान देने योग्य हैं
(क) संविधान में अनुच्छेद 1(1) मैया कहा गया है कि भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा| डॉक्टर अंबेडकर ने संविधान सभा में या कहा था कि जानबूझकर संग शब्द का प्रयोग किया गया है क्योंकि इसके कुछ फायदे हैं| इससे यह उप दर्शित होता है की (1) भारतीय परिसंघ राज्यों के बीच किसी करार का परिणाम नहीं है और (2)  राज्यों को विलग होने का अधिकार नहीं है| यह ध्यान देने योग्य है कि संग शब्द का प्रयोग स्टेफर्ड क्रिप्स ने अपने प्रस्ताव में किया था| कैबिनेट मिशन योजना में भी इसी शब्द का प्रयोग किया गया था| संघ शब्द से कुछ विशेष लक्षणों का होना सिद्ध नहीं होता| अमेरिकी संविधान में जिसे परिसंघ का आदर्श माना जाता है या शब्द प्रयुक्त है| यूनियन ऑफ साउथ अफ्रीका 19 09 द्वारा एकिक संविधान की रचना की  गई| उसमें भी इसी शब्द का प्रयोग किया गया| विघटन के पूर्व सोवियत रूस का जो संविधान था उसमें रूस को यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक कहा गया था| यह कहना उचित होगा कि प्रारूप कार किसी संविधान पर जो नाम की पर्ची लगा देते हैं वह निश्चायाक साक्ष्य नहीं हो सकतीसकती| संविधान किस प्रकार का है या उसे समग्रता में देखकर तय करना होगा नाम से नहीं|
(ख) 73 वें और 74 वें संशोधनों द्वारा सरकार का एक नया स्तर बनाया गया है- पंचायत और नगरपालिका| इन्हें शक्तियां और कृतित्व सौपे गए हैं| इसे सरकार का तीसरा स्तर माना जा सकता है| इन संशोधन के बाद भारत के संविधान में दो नहीं तीन स्तर की सरकारों का उपबंध है| यह परिसंघ का एक नवीनतम रूप  है जो शेष विश्व को अज्ञात है| किसी भी जिले, क्षेत्र याद नगर की स्थानीय सरकार साधारणतया विधान मंडल द्वारा बनाए गए अधिनियम की सृष्टि होती है| भारत में इनका सृजन संविधान द्वारा किया गया है| संविधान के उपबंधो की अनु पूर्ति में अधिनियम बनाए गए हैं|
द्वैध शासन का स्वभाविक परिणाम होता है दो सरकारों के बीच शक्तियों और कृतियों का विभाजन| सभी संविधानिक प्रणालियों में परिसंघ और राज्य इकाइयों के बीच वितरण एक सा हो यह आवश्यक नहीं है| विषयों का वितरण दो भागों में हो सकता है| अर्थात पर संघीय विषय और राज्य के विषय जैसे कि अमेरिका में है या विषयों को तीन सूचियों में बांटा जा सकता है - केंद्र सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची  जैसे कि आस्ट्रेलिया में है| अवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास हो सकती हैं या राज्यों के पास| इन सूचियों के अतिरिक्त भी शक्तियों के विभाजन के अनेक तरीके हैं|

2. वितरण को स्पष्ट और स्थाई करने के लिए उसका लिखित होना आवश्यक है| साथी यह भी आवश्यक है कि संविधान में अधिकथित  प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए उसमें संशोधन और परिवर्तन किए जा सकें| यदि अलिखित अभी समय या समझौते या समझौते पर छोड़ दिया जाए तो इससे अनिश्चितता उत्पन्न होगी और उसका परिणाम होगा घटक इकाइयों में असंतोष और संघर्ष|
3. संविधान को एक उच्चतर विधि माना जाता है| संघ और राज्य दोनों को उसका पालन और सम्मान करना अनिवार्य है| किसी भी कई कोई अधिकार नहीं है विवाह संविधान का अध्यारोपण करे या उसकी उपेक्षा करेकरे| कुछ मामलों में संघ के पास आध्यारोही शक्तियां हो सकती हैं किंतु शक्तियों के विभाजन के बारे में नहीं| परिषद संविधान शक्तियों के वितरण की सावधानी से रक्षा करते हैं और उसमें अतिक्रमण को सहन नहीं करते| जैसे सार्वजनिक निगम उस अधिनियम से शक्तियां प्राप्त करते हैं जिनके द्वारा उनका सृजन किया गया है उसी प्रकार परिसंघ में दोनों सरकारें संविधान से शक्तियां प्राप्त करती हैं संविधान से नियंत्रित होती है और संविधान द्वारा अंकित सीमाओं के भीतर काम करते हैं|
4. कठोरता का यह अर्थ नहीं है कि संविधान में कोई परिवर्तन नहीं हो सकता और वह सदैव यथावत बना रहेगा| किंतु लिखित संविधान होने के कारण यह आवश्यक हो जाता है की शक्तियों का वितरण करने वाले उपबंध केंद्र या राज्य के विवेक पर ना छोड़ दिया जाएं| संशोधन की प्रक्रिया में यह अधिकथित किया जाना चाहिए कि संशोधन के लिए दोनों की सहमति होना आवश्यक है| हमारे संविधान में यह बंद है की संशोधन करने के लिए केंद्र में विशेष बहुमत और उसके बाद कम से कम आधे राज्यों द्वारा उसका अनु समर्थन होना चाहिए|
5. परिसंघ में इस बात की संभावना होती है कि एक राज्य से दूसरे राज्य के अधिकारों पर अतिक्रमण करे| इस बात की संभावना भी है कि संघ एक या अधिक राज्यों के अधिकार छीनने का प्रयत्न करें या राज्य संघ के कृतियों का प्रयोग करने का प्रयास करें| ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए परिसंघ में एक स्वतंत्र न्यायपालिका की परिकल्पना की जाती है जो इकाइयों के अधिकार तय करें और उन्हें अपनी सीमाओं के भीतर बांधे रखें| संविधान के निर्वाचन के विषय में सभी प्रश्नों पर न्यायालय का मत निर्णायक होता है| हमारा संविधान परिसंघ से संबंधित विषयों के बारे में उच्च न्यायालय को मूल अधिकारिता देता है| सरकार उच्चतम न्यायालय को इकाइयों के बीच उठने वाली सभी विवादों का निर्णायक बनाया जाता है|

ऊपर बताए गए पांचों विशिष्ट लक्षण हमारे संविधान में मिलते हैं| हमारा संविधान एक निश्चित दस्तावेज है जो द्वैध राज्य व्यवस्था स्थापित करता है| एक केंद्रीय और 28 राज्य सरकारें| प्रत्येक की  शक्ति का स्रोत हमारे देश की सर्वोच्च विधि है अर्थात हमारा संविधान| और राज्यों की शक्तियां अपने अपने क्षेत्र में संविधान द्वारा बनाई गई सीमाओं के भीतर सर्वोच्च हैं| संविधान को सर्वोच्चता प्रदान की गई है| अकेला केंद्र किसे परिवर्तित नहीं कर सकता| संविधान के जो परिसंघिय लक्षण हैं उनका संशोधन करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार दोनों प्रकार की सब कारों की सहमति चाहिए| दोनों प्रकारों की सरकारों के बीच विधाई और प्रशासनिक शक्तियों के विभाजन की रक्षा के लिए संविधान ने उच्चतम न्यायालय बनाया है| उच्चतम न्यायालय किसी भी कार्य को जो विभाजन का अतिक्रमण करता हो  अविधिमान्य ठहरा सकता है और रोक सकता है| चाहे वह काल प्रशासनिक हो या विधायी|
उच्चतम न्यायालय में कोई भी ऐसा व्यक्ति समावेदन कर सकता है जो शक्तियों के उल्लंघन से व्यथित हो| प्रत्येक राज्य संघ उच्चतम होने में समावेदम करने का अधिकारी है| हमारे संविधान में इन लक्षणों की विद्यमानता के आधार पर उच्चतम न्यायालय ने हमारे संविधान को परिसंघीय कहा है|

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