सामान्य व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी

 सामान्य व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी

जिस अपराधी पर इनाम घोषित हो उसे कोई भी सामान्य व्यक्ति गिरफ्तार कर सकता है ऐसे व्यक्ति को आवश्यक है कि वह तुरंत गिरफ्तार अपराधी को पुलिस के हवाले कर दे| परंतु यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है कि किसी को मात्र संदेह के आधार पर सामान्य व्यक्ति गिरफ्तार नहीं कर सकता, इश्तहारी अपराध को गिरफ्तार कर सामान्य व्यक्ति थाने भिजवा आएगा इसमें जरा भी विलंब न करना होगा

इस विषय में कुछ अन्य बातें भी जानकारी योग है  | जैसे_ बिना वारंट उस व्यक्ति को भी गिरफ्तार हो सकती है जो मजिस्ट्रेट की उचित में अपराध कर रहा हो या मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में अपराध किया जाए|

इन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता

सेंट्रल रिज़र्व फोर्स का कोई भी व्यक्ति जो अपने कर्तव्य पालन का कार्य करने के कारण या अन्य संभावित व्यक्ति कार्य के निर्वाहन कि किसी भी कार्यवाही के लिए तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जब तक केंद्र सरकार की स्वीकृति ना हो| इसके अतिरिक्त राज्य सरकार अधिनियम द्वारा सुरक्षा बल के वर्ग या  प्रवर्ग  के सदस्यों के विषय में आदेश दे  सकती है| आदेश के अंतर्गत सुरक्षा बलों का कोई व्यक्ति तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जब तक राज्य सरकार की स्वीकृति न प्राप्त हो|

गिरफ्तारी कब और कैसे? 

गिरफ्तारी के विषय में पुलिस को अधिकार है कि वह गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक उपाय उपयुक्त में ला सकते हैं जैसे - अपराधी के शरीर को पकड़ कर मजबूर करना आदि| किंतु यह उपाय कानून सम्मत  होने चाहिए क्योंकि गिरफ्तारी के लिए मरते जाने वाले उपायों का उद्देश अपराधी को उस सीमा तक विवश करना होता है जब तक कि विश्वास ना हो जाए कि अपराधी  ने स्वयं को गिरफ्तारी के लिए  समर्पण  कर दिया है| गिरफ्तारी के समय यदि कोई विरोध करता है तो उसे भी गिरफ्तार करने के लिए सभी प्रकार के उपाय या साधन प्रयोग में लाया जा सकते हैं| इस विषय में भी कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना आवश्यक होता है| गिरफ्तारी के संदर्भ में एक विशेष पहलू महिला का है, यदि परिस्थिति वश किसी महिला की गिरफ्तारी की जानी है, तो वाह असाधारण परिस्थितियों में में ही संभव है और यह गिरफ्तारी भी सूर्योदय के पूर्व और सूर्यास्त के बाद की जाती है| इसमें न्यायालय मजिस्ट्रेट की आज्ञा ली जाती है तथा गिरफ्तारी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा की जाती है|

पुलिस अधिकारी जिसके पास गिरफ्तारी का वारंट हो उसे उस स्थान जहां पर अपराधी मजबूत है परंतु वहां पर प्रवेश कानून वंचित है तो भी पुलिस अधिकारी अपने अधिकार व प्रयोजन की सूचना देकर वहां प्रवेश कर सकता है| अपराधी किसी महिला कक्ष में छिपा हो जहां प्रदा रखा जाता है तो पुलिस अधिकारी वहां की स्त्रियों को वहां से हटने की सुविधा देकर अपराधी की गिरफ्तारी कर सकता है| अपराधी कहीं भी छिपा हो पुलिस अधिकारी खिड़की दरवाजे तोड़कर भी गिरफ्तारी के लिए वहां प्रवेश कर सकता है| यदि कोई सक्षम अधिकारी है तो बिना वारंट के ही भारत के किसी भी स्थान पर उसका पीछा करके व घेर कर उसे गिरफ्तार कर सकता है| जिस समय कोई व्यक्ति गिरफ्तार कर लिया जाता है, तो पुलिस अधिकारी द्वारा उसकी कानूनी रिहाई की सूचना( जानकारी) मुचलके  व जमानत के संबंध में दी जाती है| इसके अलावा जो गिरफ्तार व्यक्ति है वह अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने परिवार, मित्रों को दे सकता है| इस संबंध में व्यक्ति की गिरफ्तारी की सूचना किसे दी गई इस पुलिस थाने में रखी संबंधित परियोजनार्थ पुस्तक में दर्ज किया जाना आवश्यक होता है

जिस समय कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करता है तो उस व्यक्ति के अपराध के विषय में पूर्ण विशिष्टयो , गंभीरता तथा अन्य धाराओं की सूचना देता है| इसके अतिरिक्त गिरफ्तार व्यक्ति पर उतने ही बंधन उचित है जितने निकाल भागने से रोकने के लिए आवश्यक है|

पुलिस थाने में गिरफ्तार कर लाए गए शख्स को तुरंत उसकी कानूनी अधिकारों के बारे में पुलिस अधिकारी जानकारी देगा| यह अधिकार पुलिस अधिकारी को है कि वह गिरफ्तार व्यक्ति के पहन्ने के वस्त्र तथा ब्राह्मण अन्य वस्तुओं को अपने पास रख सकेगा तथा उसकी सूची गिरफ्तार व्यक्ति को देगा| गिरफ्तार व्यक्ति की शारीरिक परीक्षा से कोई सुबूत मिलने की संभावना होने पर चिकित्सा जांच होनी चाहिए| मान्य अस्तर तक बल प्रयोग भी अपराधी के विरुद्ध विरोध करने पर किया जा सकता है|

जिस मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तार व्यक्ति को पेश किया जाता है, उसका यह कर्तव्य है कि वह बंदी बनाए गए व्यक्ति की कानूनी अपेक्षाओं का ध्यान रखें तथा उसका समाधान भी करें| यदि गिरफ्तार व्यक्ति हथियार बंद है तो गिरफ्तारी के पश्चात उसे पुलिस अधिकारी हथियार ले सकता है ऐसे प्राप्त शब्दों को उन न्यायालय या अधिकारी के सामने प्रस्तुत किया जाता है जहां गिरफ्तारी के पश्चात उस व्यक्ति को पेश होना है|


गिरफ्तारी के लिए विशेष ध्यान महिला की विशेष में रखा जाता है यदि गिरफ्तारी के पश्चात महिला की गिरफ्तारी होती है तो यह कार्य पूर्ण शालीनता व शिष्टता पूर्वक किया जाएगा| तलाशी भी किसी महिला द्वारा ली जाएगी साथ ही गिरफ्तार महिला की जांच यदि आवश्यक है तो जांच या शारीरिक परीक्षा किसी पंजीकृत महिला चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए|

चिकित्सकीय जांच का महत्व बलात्कार के  आरोपी की जांच प्राधिकृत चिकित्सालय के रजिस्टर्ड चिकित्सा व्यवसायी द्वारा करवाई जानी चाहिए| इस संदर्भ में ज्ञातव्य है कि यदि 16 किलोमीटर के दायरे में कोई सरकारी अथवा कोई स्थानीय अधिकृत चिकित्सालय नहीं है तो किसी अन्य पंजीकृत डॉक्टर से यह जांच करवाई जा सकती है|


इस विषय में पंजीकृत चिकित्सक जांच करके मेडिकल रिपोर्ट तैयार करता है यह रिपोर्ट निम्न आधारों पर तैयार की जाती है|

1, मुजरिम का नाम पता तथा आयु|

2, अभियुक्त जो लाया गया उसका नाम व अन्य विवरण|

3, ऐसा संपूर्ण विवरण जिससे निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके|

4, डी एन ए की जांच में मुजरिम के शरीर से लिए गए रक्त व अन्य सामग्री का ब्यौरा|

5 जिस समय मेडिकल जांच शुरू हुई और जिस समय जांच पूरी हुई उस समय का रिपोर्ट में अंकन|

6, ऐसी स्थिति में जब अभियुक्त कहे कि मेडिकल रिपोर्ट से वह निर्देश सिद्ध हो सकता है तो उसकी मेडिकल जांच होनी चाहिए| ऐसी अवस्था मैं जब अभियुक्त यह जोर देकर कहे कि उसे शारीरिक के प्रति अन्याय किया गया है तब पंजीकृत चिकित्सक द्वारा उसकी जांच की जाती है|

7, यदि थाने का भार साधक अधिकारी अभियुक्त की शिनाख्त करवाने का निवेदन करें तो सक्षम न्यायालय द्वारा शिनाख्त का आदेश दिया जा सकता है|

8, गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटों के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा किंतु यदि न्यायालय की की दूरी अधिक है तो यात्रा में व्यतीत समय को उन 24 घंटों में सम्मिलित नहीं किया जाएगा|

9, किसी थाने की सीमाओं में थाने के समक्ष अधिकारी द्वारा जब भी अपने क्षेत्र में बिना वारंट गिरफ्तारी होगी तो पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है कि वह इसकी सूचना डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या डी, एम के आदेश पर  उपखण्ड 

 मजिस्ट्रेट को ऐसी गिरफ्तारी की   सूचना दें  | ऐसा करना उस परिस्थिति में भी जरूरी है जब गिरफ्तार व्यक्ति की जमानत न भी हुई हो|


गिरफ्तारी संबंधी अन्य जानकारी

यदि कोई व्यक्ति न्यायालय कस्टडी से भागे या उसे छुड़वाया गया हो तो पुलिस उसका पीछा करके देश के किसी भी स्थान पर गिरफ्तारी कर सकती है| गिरफ्तार व्यक्ति की रिहाई पुलिस अधिकारी द्वारा चल मुचलके जमानत पर या मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जा सकती है| इसके अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं होता| अपराध के आरोपी के विषय में न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी का वारंट जारी किया जाता है| धारा 70 के प्रावधान के अनुसार यह वारंट उसे पुलिस अधिकारी के लिए किया जाता है जो वारंट को तमिल करता है|

बिना वारंट गिरफ्तारी

यदि पुलिस किसी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तारी करती है तो उसे गिरफ्तार करते ही गिरफ्तारी का कारण बताना होगा| अगर गिरफ्तार भक्ति जमानत कराने का हकदार है तो उसे उसके अधिकार की सूचना दे देनी चाहिए और अपने जमानतीयो की

  व्यवस्था करने का अवसर देना चाहिए  |

गिरफ्तार व्यक्ति तत्काल प्रभाव से अपने लिए एक वकील नियुक्त कर सकता है| वाह वाह वकील व्यक्ति से पूछताछ के दौरान वहां उपस्थित रह सकता है| अगर गिरफ्तारी गैर जमानती अपराध के तहत हुई है तो गिरफ्तार व्यक्ति किसी भी समय मजिस्ट्रेट के सामने जमानत याचिका भेज सकता है|

बिना वारंट के गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को पुलिस 24 घंटों से ज्यादा समय तक अपनी हिरासत में नहीं रख सकती| अगर ऐसा लगे कि जांच पड़ताल 24 घंटों में पूरी नहीं हो सकती तो जांच करने वाला अधिकारी मुकदमे के कागजात के साथ गिरफ्तार शुदा व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगा| अगर मजिस्ट्रेट जरूरी समझे तो मुजरिम को अधिक समय तक हिरासत में रखने का अधिकार दे सकता है|

यह नियम हमारे संविधान और जाब्ता फौजदारी और दीवानी दोनों में शामिल है, जो सभी लोगों की जिंदगी और स्वतंत्रता की आधारभूत अधिकार की महता को दर्शाता है चाहे वह आदमी देश का नागरिक हो या विदेशी हो|

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