Questions and Answers on Women's Rights on Personal Liberty, Life and Property Rights in Hindi

Questions and Answers on Women's Rights on Personal Liberty, Life and Property Rights in Hindi

प्रश्न : व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संदर्भ में महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों को लेकर क्या प्रतिक्रिया हुई है? 
उत्तर: संविधान का अनुच्छेद 21 यह कहता है कि किसी व्यक्ति को उसके जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विविध द्वारा स्थापित प्रतिक्रिया के अनुसार ही वांचित किया जाएगा अन्यथा नहीं| पुलिस हिरासत में महिलाओं की समस्याओं का प्रश्न उत्तर न्यायालय के सामने आया| मुंबई में महिला कैदियों के साथ पुलिस हिरासत में हिंसा का मामला एक पत्र द्वारा उच्चतम न्यायालय में उठाया गया| इस पत्र पर कार्यवाही करते हुए उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश दिए कि कैसे पुलिस की हिरासत में महिलाओं के साथ बर्ताव किया  जाना चाहिए|
इन निर्देशों में बहुत सारे सुरक्षा के उपाय सम्मिलित हैं जैसे कि:
 1     संदिग्ध महिलाओं को कैद में रखने के लिए अलग स्थान की व्यवस्था की जानी चाहिए|
2 संदिग्ध महिलाओं से प्रश्न केवल महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में पूछे जाने चाहिए|
3 कोई भी व्यक्ति जिसे गिरफ्तार किया गया है| उसे गिरफ्तार करने के कारण तथा जमानत लेने के अधिकार के बारे में सूचना दी जानी चाहिए| पुलिस स्टेशन पर  एक पेंपलेट लगानी  चाहिए, जिनमें कि इन अधिकारों के बारे में बताया गया हो|
4 पुलिस द्वारा नजदीक की कानूनी सहायता समिति में गिरफ्तारी के बारे में सूचना दी जानी चाहिए समिति द्वारा गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत कानूनी सहायता दी जानी चाहिए|
5 सेशन जज को समय_ समय मैं पुलिस लॉकअप का अचानक निरीक्षण करना चाहिए|
6 पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्ति के रिश्तेदार या मित्र को गिरफ्तारी की सूचना देनी चाहिए|
7 मजिस्ट्रेट जिसके सामने गिरफ्तार व्यक्ति को प्रस्तुत किया गया है वह यह जांच करेगा कि पुलिस हिरासत में उत्पीड़न या अत्याचार की शिकायतें तो नहीं है मजिस्ट्रेट गिरफ्तार व्यक्ति को यह भी सूचना देगा कि उसे दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 54 के अंतर्गत डॉक्टरी जांच का अधिकार है| यह महिला तथा पुरुष दोनों पर लागू होता है|

प्रश्न : पति के घर में पत्नी के रहने के अधिकार से संबंधित क्या कोई संवैधानिक मुद्दे हैं? 
उत्तर: यह प्रश्न आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के सामने उठा| एक पब्लिक सेंटर  कारपोरेशन( भारत हेवी प्लैटस एंड वेसल्स लिमिटेड विशाखापट्टनम ) ने अपने कर्मचारी को पटटे पर घर दिया| वाह और उसकी पत्नी उस घर में रहने लगे| कुछ समय बाद पति- पत्नी में मतभेद उत्पन्न हो गए और पति ने  अन्य स्थान पर स्थानांतरण कर लिया| इसके प्रतिरोध में  पत्नी ने पत्ते के विरुद्ध भरण पोषण आदेश प्राप्त कर  लिया| इसके प्रतिरोध में पति ने पट्टे को खत्म कर दिया| कंपनी द्वारा निकाले जाने के डर से पत्नी ने जिला न्यायालय में गुहार लगाई| जिला न्यायालय ने अंतरिम आदेश देकर कंपनी द्वारा पत्नी को निकाले जाने पर रोक लगाई| उच्चतम न्यायालय द्वारा इस आदेश को यह कह कर वैध ठहराया गया की पत्नी तथा नाबालिग बच्चियों के रहने की व्यवस्था करने के लिए पति वाद्य है| कंपनी राज्य का ही एक उपकरण है, अंत:
कंपनी इस तरह से कार्य नहीं कर सकती कि परिवार बेघर हो जाए| उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय का समर्थन संविधान के अनुच्छेद 21 जो कि जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करती है, के अंतर्गत किया| अनुच्छेद 21 और 19 के दायरे  को बढ़ाते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह कहा है कि कभी भी आने - जाने तथा किसी के साथ भी रहने का अधिकार इन 2 अनुच्छेदों के अंतर्गत शामिल है इस प्रकार कोई भी महिला जो की बालिक है बिना विवाह के किसी भी पुरुष के साथ रह सकती है यह संवैधानिक हो सकता है परंतु_ कानूनी नहीं|

प्रश्न : क्या महिलाओं के लिए निवास से संबंधित क्या कोई भेदभाव पूर्ण प्रावधान है? 
उत्तर: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 23 भेदभाव पूर्ण थी जो कि अब हिंदू_ उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत समाप्त की जा चुकी है| धारा 23 महिला उत्तराधिकार को बंटवारे का अधिकार नहीं देती थी जब तक कि पुरुष अधिकारी अपने_ अपने हिस्से का बंटवारा न करें| यह धारा संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन थी|

प्रश्न:  संपत्ति के संबंधी महिलाओं के क्या अधिकार है? 
उत्तर: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम( संशोधन 2005) की धारा 6 के अंतर्गत महिलाओं को भी अब कोपारसनर बना दिया गया है वह भी अपने पूर्व पूर्वजों की संपत्ति में समान रूप से भागीदार है| महिलाओं तथा पुरुषों दोनों को अपने पिता या  पूर्वजों की संपत्ति से सम्मान हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार है| अंत: इस संशोधन ने भेद कारी प्रधानों को समाप्त कर दिया है|

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