जमानती - गैर जमानती अपराधी धाराएं

 जमानती गैर जमानती अपराधी धाराएं

अपराध अथवा जुर्म:- जब कोई व्यक्ति ऐसा कृत्य करता है जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अंतर्गत वर्जित है तो उसका वही कृत्य अपराध अथवा जुर्म कहलाता है | स्थापित भारतीय कानूनों के खिलाफ किया गया काम भी अपराध की श्रेणी में आता है |

जमानत के आधार पर अपराध :- किए गए अपराध के लिए व्यक्ति के प्रकरण के निस्तारण तक जमानत पर रिहाई प्राप्त हो जाती है और कई मामलों में नहीं | जमानत के आधार पर जुर्म अथवा अपराधियों को भारतीय दंड प्रक्रिया सहित अधिनियम सन 1973 संशोधित के अनुसार 3 वर्गों में बांटा गया है |

1. जमानती अपराध :- जिस में जमानत का प्रावधान है | जो अधिकार स्वरूप मिलती है |

2. गैर जमानती अपराध :- जिस में जमानत का प्रावधान ही नहीं है|

3. माननीय न्यायालय के विवेका अनुसार :- मामले की संगीता एवं अपराधी की प्रकृति के अनुसार माननीय न्यायालय विवेकाधिकार से जमानत दे भी सकता है और नहीं भी | सामान्य जानकारी के लिए पाठकों की सहायतार्थ आईपीसी कि उन धाराओं का विवरण अग्वर्णित है जिसके आधार पर अपराध की श्रेणी निर्धारित की गई है |

जमानत के अपराध :- आई पी सी कि वह धाराएं जिनके अंतर्गत अभियुक्त के लिए जमानत का प्रावधान है- धारा120 ख, 129,135,140'143, 144,147,193'198'201, से  206,209,211,216,216क, 217,218,219,221,223,224,228,228क 229,259,260,260 261,262,263,263क, 264,265,266,269,270,272 से2 76,278 से 281,283, से288, 291 से294, क, 296,297,304 क309, 311,312,317323,324,325,335,323,334, से338, 341 से3 48,352, से3 58,363,370,372,376,377,क, ख, ध, 385,388,403,417,418,419,426 से435, 440,447,448,465,469,484, से489 ग, 489ड, 494,497,498,500,क, 501,502क, 502ख, 506 से510 तक


गैर जमानती अपराध- इन अपराधों में माननीय न्यायालय अभियुक्त की जमानत स्वीकार नहीं करती है| भारतीय दंड संहिता के अनुसार निम्नलिखित धाराओं के अभियुक्त की जमानत न्यायालय द्वारा विवेका अनुसार ही स्वीकार की जाती है अधिकार स्वरूप धाराएं -115, 121,121क, 122,123,124,124क, 125 से128, 130 से134, 136,153क153,ख161, 170,194,195,231 से 235,237,238,239,244 से, 251,255 से, 258,267,295,295क, 302,303,304,304ख, 305,306,307,313 से, 316,326 से, 329,331,333,363क, 364,365,366क, 366ख, 367,368,369,373,373,379 से382, 384,386क, 364,365,366क, 366ख, 367,368,369,373,379 से382, 384,386,387,392 से, 402,406 से, 409,411 से, 414,436 से, 438,449 से457, 461,466,468,477क, 482,483,489क व505 है|

उपरोक्त अपराधिक धाराओं में जमानत माननीय न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है| अपराधी या अभियुक्त की प्रकृति तथा मामले की गंभीरता न्यायालय के विवेकाधिकार को प्रभावित करती है|

गिरफ्तारी_ अपराधों की संगीन प्रकृति के आधार पर अपराधिक कृतियों को सामान्यता दो भागों में विभाजित किया जाता है| वारंट के बिना गिरफ्तारी एवं वारंट के आधार पर गिरफ्तारी|सं संज्ञेय  अपराध_ सीआर पी सी की धारा 2 ग के अनुसार पुलिस द्वारा अभियुक्त को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाना मुमकिन है| राष्ट्रद्रोह हत्या तथा बलात्कार जैसी गंभीर अपराधों के मुजरिम को फरार होने से रोकने के लिए पुलिस को अधिकार प्रदान किए हैं ताकि वारंट के बिना गिरफ्तारी की जा सके| इस तरह के अपराध प्राय : गैर जमाने के होते हैं| पुलिस द्वारा तहकीकात तथा अन्वेषण कार्य कोर्ट की अनुमति के बिना भी किए जा सकते हैं| और इन्हें वारंट मामले भी कहा जाता है|

असंज्ञेय  अपराध_असंज्ञेय  अपराध संगीन तथा खतरनाक की श्रेणी में नहीं आते हैं| ऐसे अपराधों के लिए प्राया: गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जाता है| यह जमानती प्रकार के अपराध होते हैं और बिना वारंट के पुलिस गिरफ्तार नहीं करती है| इस तरह के अपराधों की समानता 2 वर्ष तक की सजा तथा जुर्माना अथवा दोनों की प्रावधान होता है इन्हें समन अपराध भी कहा जाता है|

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