रिपोर्ट दर्ज कराना आवश्यक है | Reporting is Mandatory

 रिपोर्ट दर्ज कराना आवश्यक है | Reporting is Mandatory

दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति रिपोर्ट दर्ज करा सकता है| इस संदर्भ में कोई भी ऐसी आपत्ति नहीं उठाई जा सकती है की रिपोर्ट दर्ज कराने का अधिकार नहीं है|

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला रामचंद्र मौर्य के प्रति उत्तर प्रदेश राज्य के एक मामले में दिया |

 रिपोर्ट का क्या महत्व है तथा कौन रिपोर्ट करा सकता है? इसे स्पष्ट करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को या विधिक अधिकार प्राप्त है कि वह रिपोर्ट दर्ज करा सके तथा पुलिस अधिकारी रिपोर्ट लिखने के लिए कर्तव्यबद्ध  है|

रिपोर्ट लिखाने का उद्देश अपराध की जांच करने के लिए पुलिस को प्रेरित करना है | रिपोर्ट का महत्व अपराध की प्रकृति तथा सूचना देने वाले व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है | सूचना देने वाले व्यक्ति को दांणिडक विधि की प्रक्रिया प्रारंभ कराने   का    अधिकार है| दंणड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के तीन उद्देश्य है- 

( अ) यह धारा पुलिस तथा जिला मजिस्ट्रेट को सूचना प्रदान कराती है|

( ब) न्यायिक अधिकार को यह सामग्री उपलब्ध कराती है जिस पर विवेचना प्रारंभ हुई है |

(स) यह झूठे आरोपों का सृजन  होने के विरुद्ध सुरक्षा का कवच है|

जिस समय रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही हो तो उस समय    साक्षय     प्रमाण होना जरूरी नहीं है | रिपोर्ट तुरंत दर्ज की जानी चाहिए तथा पुलिस अपराध को पूरी तरह से घटित होने की सूचना नहीं कर सकती है|

रिपोर्ट में अभियुक्तों अथवा गवाहों का नाम होना भी अनिवार्य नहीं है | रिपोर्ट दर्ज होने के लिए यह जरूरी है कि किसी संज्ञेय अपराध के घटित होने की सूचना      के संबंध में पुलिस अधिकारी रिपोर्ट दर्ज करने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकते हैं की सूचना विश्वसनीय नहीं है|

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