सजा की कमी

 सजा की कमी

कोई भी अपराधी अपनी सजा को कम या माफ करने की अर्जी सरकार को दे सकता है। जब किसी अपराधी द्वारा समुचित सरकार को अपनी सजा को क्षमा करने की अर्जी दी जाती है तब सरकार शर्तों पर या बिना शर्तों के सजा का कोई भाग्य या पूरी सजा माफ कर सकती है।  लेकिन सरकार सीआरपीसी की धारा 432 433 के अनुसार की सजा को माफ कर सकती है। 

जब समुचित सरकार को ऐसी अर्जी मिलती है तो सरकार सजा देने वाले जज को सलाह देती है और उस जैसे पूछती है कि अपराधी की अर्जी मंजूर की जाए या नहीं? सरकार अर्जी देने वाले अपराधी की सजा के लिए विशेष शर्तों पर ही माफ कर सकती है।  यदि अपराधी शर्तों का पालन नहीं करता है तो सरकार माफी को वापस ले सकती है। 

मेरी सजा माफी के बाद अपराधी छोड़ दिया जाता है और अपराधी अपनी शर्तों को तोड़ता है तो पुलिस उसे दोबारा गिरफ्तार कर सकती है। अतः सरकार से क्षमा मिलने पर अपराधी को अपने ऊपर लागू शर्तों का पालन करना चाहिए ताकि उसकी दोबारा गिरफ्तारी न हो। 

सीआरपीसी की धारा 432 433 के अनुसार समुचित सरकार सजा-ए-मौत को आजीवन कारावास में आजीवन कारावास को 18 वर्ष की कैद में आजीवन कारावास को जुर्माने में कठोर कारावास को साधारण कारावास में साधारण कारावास को जुर्माने में बदल सकती है। 

सीआरपीसी की धारा 432 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को मृत्यु दंड की सजा दी गई है तो उसे सजा में कमी करने के बाद भी 14 वर्ष की कैद भुगतनी ही होगी।  सीआरपीसी की धारा 435 के अनुसार कुछ मामलों में सजा को कम करते समय राज सरकार की सरकार की सलाह भी लेगी। 

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