कर्फ्यू धारा 144

 कर्फ्यू धारा 144

सीआरपीसी की धारा 144 के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट या कोई कार्यपालक मजिस्ट्रेट कर्फ्यू का आदेश दे सकता है, लेकिन इस आदेश के साथ कोई गैर कानूनी शर्त लागू नहीं की जा सकती। 

उदाहरण- 1 तुम अपने घर में नहीं रहोगे जिसमें तुम रहते आ रहे हो। 

2 घर से बाहर निकलने पर गोली मार दी जाएगी। 

कर्फ्यू लगने को ही धारा 144 लगना कहते हैं।  यदि कोई व्यक्ति धारा 144 का उल्लंघन करता है तो उस व्यक्ति पर आईपीसी की धारा 188 के अनुसार मुकदमा चलाया जा सकता है।  धारा 144 आने वाली आफतों और मुसीबतों को दूर करने के लिए लगाई जाती है। 

सीआरपीसी की धारा 129 132 में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए काम में लिए जाने वाले उपायों का वर्णन किया गया है| भीड़ दो प्रकार की होती है। 

1 कानूनी भीड़: इसको विधि के अनुसार जमाव भी कहते हैं इस भीड़ का मकसद कोई अपराधी या गैर कानूनी काम करना नहीं होता। 

2 गैर कानूनी भीड़: इसको विधि विरुद्ध जमाव भी कहते हैं।  इस भीड़ का मकसद कोई अपराध करना होता है । 

उदाहरण : 1 अपने किसी मांग को लेकर शांति पूर्ण तरीके से सड़क पर जमा हो एकत्र करना कानूनी भीड़ है। 

2 50 व्यक्तियों का बाजार में तोड़फोड़ करने के लिए एकत्रित होना या एक विधि विरुद्ध जमाव है। 

विधि जमाव के बारे में सीआरपीसी की धारा 141 में वर्णन किया गया है लेकिन यदि लोगों का जमाव किसी अधिकारी के आदेश पर तितर-बितर नहीं होता है तो जमाव को विधि विरुद्ध जमाव का दर्जा नहीं दिया जा सकता। 

भीड़ को तितर-बितर करने का आदेश कोई कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी या कोई राजपत्रित अधिकारी दे सकता है।  किसी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सबसे पहले उस जमाव को तितर-बितर होने का आदेश दिया जाता है।  यदि आदेश के बाद भी भीड़ तितर-बितर नहीं होती तो सिविल बल का प्रयोग किया जाता है।  शिविर बल का प्रयोग करते समय अधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि इससे कम से कम जनधन को हानि हो।  भीड़ तितर-बितर ना होने पर उस को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। यदि भीड़ अधिकारी का आदेश नहीं मानती है तो आईपीसी की धारा 145 के अनुसार भीड़ में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाकर 2 वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है। यदि भीड़ गैरकानूनी है तो आईपीसी की धारा 149 के अनुसार भीड़ को सजा दी जाएगी।  भीड़ को तितर-बितर करने का आदेश देने वाले अधिकारी को अपराधी नहीं माना जाता है। उस अधिकारी पर मुकदमा चलाने के लिए पहले राज्य सरकार या केंद्र सरकार की मंजूरी प्राप्त करनी होगी। 

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