Section 214 IPC in Hindi and English

 Section 214 IPC in Hindi and English



Section 214 of IPC 1860:-Offering gift or restoration of property in consideration of screening offender -

Whoever gives or causes, or offers or agrees to give or cause, any gratification to any person, or restores or causes the restoration of any property to any person, in consideration of that person's concealing an offence, or of his screening any person from legal punishment for any offence, or of his not proceeding against any person for the purpose of bringing him to legal punishment;

if a capital offence - shall, if the offence is punishable with death, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine;

if punishable with imprisonment for life, or with imprisonment - and if the offence is punishable with imprisonment for like, or with imprisonment which may extend to ten years, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine;

and if the offence is punishable with imprisonment not extending to ten years, shall be punished with imprisonment of the description provided for the offence for a term which may extend to one-fourth part of the longest term of imprisonment provided for the offence, or with fine, or with both.

Exception - The provisions of sections 213 and 214 do not extend to any case in which the offence may lawfully be compounded.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 214 of Indian Penal Code 1860:

Mohd. Aslam vs State Of Madhya Pradesh on 24 November, 1978

Mustakmiya Jabbarmiya Shaikh vs M.M. Mehta, Commissioner Of on 23 March, 1995

Mustakmiya Jabbarmiya Shaikh vs M.M. Mehta, Commissioner Of  on 23 March, 1995

Mohan Singh vs State Of Bihar on 26 August, 2011

P. Mohanraj vs M/S. Shah Brothers Ispat Pvt. Ltd. on 1 March, 2021

Jik Industries Ltd. & Ors vs Amarlal V.Jumani & Anr on 1 February, 2012

Sri Jayendra Saraswathy vs State Of Tamil Nadu And Others on 26 October, 2005

Rafiq Ahmed @ Rafi vs State Of U.P on 4 August, 2011



आईपीसी, 1860 (भारतीय दंड संहिता) की धारा 214 का विवरण -अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन -

जो कोई किसी व्यक्ति को कोई अपराध उस व्यक्ति द्वारा छिपाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दण्ड से प्रतिच्छादित किए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को वैध दण्ड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही न की जाने के लिए प्रतिफलस्वरूप कोई परितोषण देगा या दिलाएगा या देने या दिलाने की प्रस्थापना या करार करेगा, या कोई संपत्ति प्रत्यावर्तित करेगा या कराएगा।

यदि अपराध मृत्यु से दण्डनीय हो - यदि वह अपराध मृत्यु से दण्डनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

यदि आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय हो - तथा यदि वह अपराध आजीवन कारावास से या दस वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा;

तथा यदि वह अपराध दस वर्ष से कम के कारावास से दण्डनीय हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से इतनी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

अपवाद - धारा 213 और धारा 214 के उपबंधों का विस्तार किसी ऐसे मामले पर नहीं है, जिसमें कि अपराध का शमन विधिपूर्वक किया जा सकता है।



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