Section 213 IPC in Hindi and English

Section 213 IPC in Hindi and English



Section 213 of IPC 1860:-Taking gift, etc., to screen an offender from punishment -

Whoever accepts or attempts to obtain, or agrees to accept, any gratification for himself or any other person, or any restitution of property to himself or any other person, in consideration of his concealing an offence or of his screening any person from legal punishment for any offence, or of his not proceeding against any person for the purpose of bringing him to legal punishment,

if a capital offence - shall, if the offence is punishable with death, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine;

if punishable with imprisonment for life, or with imprisonment - and if the offence is punishable with imprisonment for life, or with imprisonment which may extend to ten years, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine;

and if the offence is punishable with imprisonment not extending to ten years, shall be punished with imprisonment of the description provided for the offence for a term which may extend to one-fourth part of the longest term of imprisonment provided for the offence, or with fine, or with both.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 213 of Indian Penal Code 1860:

Chhadami Lal Jain And Others vs The State Of Uttar Pradesh on 14 September, 1959

Ramgopal Ganpatrai Ruia & Another vs The State Of Bombay on 8 October, 1957

R. R. Chari vs State Of U.P on 28 March, 1962



आईपीसी, 1860 (भारतीय दंड संहिता) की धारा 213 का विवरण -अपराधी को दण्ड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना -

जो कोई अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई परितोषण या अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी संपत्ति का प्रत्यास्थापन, किसी अपराध के छिपाने के लिए या किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दण्ड से प्रतिच्छादित करने के लिए, या किसी व्यक्ति के विरुद्ध वैध दण्ड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही न करने के लिए, प्रतिफल प्रतिगृहीत करेगा या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा या प्रतिगृहीत करने के लिए करार करेगा,

यदि अपराध मृत्यु से दण्डनीय हो - यदि वह अपराध मृत्यु से दण्डनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा; 

यदि आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय हो - तथा यदि वह अपराध आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय हो तो वह दोनों में से किसी भांति कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा;

तथा यदि वह अपराध दस वर्ष से कम तक के कारावास से दण्डनीय हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से इतनी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई-तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।



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