Section 41H The Factories Act, 1948

 Section 41H The Factories Act, 1948 : 

Right of workers to warn about imminent danger.—

(1) Where the workers employed in any factory engaged in a hazardous process have reasonable apprehension that there is a likelihood of imminent danger to their lives or health due to any accident, they may bring the same to the notice of the occupier, agent, manager or any other person who is incharge of the factory or the process concerned directly or through their representatives in the Safety Committee and simultaneously bring the same to the notice of the Inspector.

(2) It shall be the duty of such occupier, agent, manager or the person incharge of the factory or process to take immediate remedial action if he is satisfied about the existence of such imminent danger and send a report forthwith of the action taken to the nearest Inspector.

(3) If the occupier, agent, manager or the person incharge referred to in sub-section (2) is not satisfied about the existence of any imminent danger as apprehended by the workers, he shall, nevertheless, refer the matter forthwith to the nearest Inspector whose decision on the question of the existence of such imminent danger shall be final.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 41H The Factories Act, 1948: 

The Tamil Nadu Fireworks And vs The Principal Secretary To on 3 April, 2013

The Tamil Nadu Fireworks And  vs The Principal Secretary To on 3 April, 2013

A.P. Paper Mills Ltd. Etc. Etc vs Government Of A.P. And Anr on 28 September, 2000

A.P. Paper Mills Ltd. Etc. Etc vs Government Of A.P. And Anr on 28 September, 2000

Mangesh G. Salodkar vs Monsanto Chemicals Of India Ltd.  on 13 July, 2006



कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 41ज का विवरण - कर्मकारों का आसन्न खतरे के बारे में चेतावनी देने का अधिकार-(1) जहां किसी परिसंकटमय प्रक्रिया में लगे किसी कारखाने में नियोजित कर्मकारों को युक्तियुक्त आशंका हो कि किसी दुर्घटना के कारण उनके जीवन या स्वास्थ्य को संभाव्यतः आसन्न खतरा है, वहां वे उसे अधिष्ठाता, अभिकर्ता, प्रबंधक या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति की, जो कारखाने या संबंधित प्रक्रिया का भारसाधक है, जानकारी में सीधे या सुरक्षा समिति के अपने प्रतिनिधियों की मार्फत ला सकेंगे और साथ ही उसे निरीक्षक की जानकारी में भी ला सकेंगे । 

(2) ऐसे अधिष्ठाता, अभिकर्ता, प्रबंधक या कारखाने या प्रक्रिया के भारसाधक व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह तुरंत उपचारी कार्रवाई करे, यदि उसका ऐसे आसन्न खतरे की विद्यमानता के बारे में समाधान हो जाता है और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तत्काल निकटतम निरीक्षक को भेजें ।

(3) यदि उपधारा (2) में निर्दिष्ट अधिष्ठाता, अभिकर्ता, प्रबंधक या भारसाधक व्यक्ति का कर्मकारों द्वारा आशंकित रूप में किसी आसन्न खतरे की विद्यमानता के बारे में समाधान नहीं होता है तो भी वह इस मामले को निकटतम निरीक्षक को तत्काल निर्देशित करेगा जिसका ऐसे आसन्न खतरे की विद्यमानता के बारे में विनिश्चय अंतिम होगा ।]



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