Section 89 Negotiable Instruments Act, 1881


Section 89 Negotiable Instruments Act, 1881 in Hindi and English 

Section 89 Negotiable Instruments Act, 1881 :(1)] Where a promissory note, bill of exchange or cheque has been materially altered but does not appear to have been so altered.

or where a cheque is presented for payment which does not at the time of presentation appear to be crossed or to have had a crossing which has been obliterated, payment thereof by a person or banker liable to pay, and paying the same according to the apparent tenor thereof at the time of payment and otherwise in due course, shall discharge such person or banker from all liability thereon; and such payment shall not be questioned by reason of the instrument having been altered, or the cheque crossed.

(2) Where the cheque is an electronic image of a truncated cheque, any difference in apparent tenor of such electronic image and the truncated cheque shall be a material alteration and it shall be the duty of the bank or the clearing house, as the case may be, to ensure the exactness of the apparent tenor of electronic image of the truncated cheque while truncating and transmitting the image.

(3) Any bank or a clearing house which receives a transmitted electronic image of a truncated cheque, shall verify from the party who transmitted the image to it, that the image so transmitted to it and received by it, is exactly the same.

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 89 of Negotiable Instruments Act, 1881 :

Bank Of Maharashtra vs Automotive Engineering Co. on 8 December, 1992

P. Mohanraj vs M/S. Shah Brothers Ispat Pvt. Ltd. on 1 March, 2021

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 89 का विवरण :  - ( 1 ) जहाँ कि वचनपत्र, विनिमय-पत्र या चैक तात्विक रूप में परिवर्तित किया गया है किन्तु यह प्रतीत नहीं होता है कि वह ऐसे परिवर्तित किया गया है.

या जहाँ कि ऐसा चैक, जो कि उपस्थापन के समय ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वह क्रॉस किया हुआ है अथवा उस पर क्रासिंग थी जो मिटा दी गई है, संदाय के लिए उपस्थापित किया जाता है, वहाँ संदाय के लिए दायी व्यक्ति और या बैंकार द्वारा उसका संदाय और संदाय के समय उसके प्रकट शब्दों के अनुकूल संदाय और सम्यक्-अनुक्रम में अन्यथा उसके संदाय से ऐसा व्यक्ति या बैंकार उसके सब दायित्व से उन्मोचित हो जाएगा और ऐसा संदाय लिखत के परिवर्तित किए जाने या चैक के क्रॉस किये जाने के कारण प्रश्नगत न किया जाएगा ।

(2) जब चैक इलेक्ट्रानिक रूपक छंटित चैक है, ऐसे इलेक्ट्रानिक रूपक के प्रत्यक्ष प्रकट शब्द एवं छंटित चैक में कोई अंतर तात्पर्यत परिवर्तन है, तब बैंक या समाशोधन-गृह जैसी स्थिति हो, का कर्तव्य होगा, कि छंटित चैक की इलेक्ट्रानिक रूपक के प्रत्यक्ष प्रकट शब्द की निश्चितता को सुनिश्चित करे, जब वह इलेक्ट्रानिक रूपक को छंटित और पारेषित करता है ।

(3) कोई बैंक या समाशोधन-गृह जो पारेषित इलेक्ट्रानिक रूपक छंटित चैक प्राप्त करता है, वह उस पक्षकार से सत्यापित करेगा, जिसने उसका रूपक पारेषित किया है, उसका पारेषित रूपक और उसे प्राप्त हुआ वह, सुनिश्चित एक समान है ।

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