Section 55 The Army Act, 1950

 

Section 55 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 55 The Army Act, 1950  :. Injury to property. Any person subject to this Act who commits any of the following offences, that

is to say,-

(a) destroys or injures any property mentioned in clause (a) of section 54 or any property belonging to

any military, naval or air force mess, band or institution, or to any person subject to military, naval or

air force law, or serving with, or attached to, the regular Army; or

(b) commits any act which causes damage to, or destruction of, any property of the Government by

fire; or

(c) kills, injures, makes away with, ill- treats or loses any, animal entrusted to him; shall, on conviction

by court- martial, be liable, if he has acted wil- fully, to suffer imprisonment for a term which may

extend to fourteen years or such less punishment as is in this Act mentioned; and if he has acted

without reasonable excuse, to suffer imprisonment for a term which may extend to seven years or

such less punishment as is in this Act mentioned.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 55 of The Army Act, 1950  :

Union Of India & Anr vs Jai Kishun Singh(D) Thr. Lrs. on 10 September, 2014

Prafulla Chandra Mohapatra vs State Of Orissa And Others on 17 September, 1992

Mumtaz Hussatn Ansari vs State Of U.P. & Anr on 21 March, 1984

Bhagat Ram vs State Of Himachal Pradesh And Ors. on 24 January, 1983



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 55 का विवरण :  - सम्पत्ति को क्षति - इस अधिनियम के अध्यधीन का कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्:-

(क) धारा 54 के खंड (क) में वर्णित कोई सम्पत्ति या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायु सेना बल के मैस, बैंड या संस्था की या सैनिक, नौसैनिक या वायु सेना के विधि के अध्यधीन के या नियमित सेना में सेवा करने वाले या उससे संलग्न व्यक्ति की कोई सम्पत्ति नष्ट करेगा या उसे क्षति करेगा, अथवा

(ख) कोई ऐसा कार्य करेगा जिसके कारण अग्नि से सरकार की किसी सम्पत्ति को नुकसान होता है या उसका नाश होता है, अथवा

(ग) अपने को न्यस्त किए हुए किसी जीवजन्तु को मार देगा, क्षति करेगा, गायब कर देगा, या उससे बुरा बर्ताव करेगा या उसे गंवा देगा,

सेना-न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, उस दशा में, जिसमें उसने जानबूझकर ऐसा कार्य किया है कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा, और उस दशा में जिसमें उसने युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना ऐसा कार्य किया है, कारावास, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा।



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