Section 52 Negotiable Instruments Act, 1881

 


Section 52 Negotiable Instruments Act, 1881 in Hindi and English 


Section 52 Negotiable Instruments Act, 1881 :The indorser of a negotiable instrument may, by express words in the indorsement, exclude his own liability thereon, or make such liability or the right of the indorsee to receive the amount due thereon depend upon the happening of a specified event, although such event may never happen.

Where an indorser so excludes his liability and afterwards becomes the holder of the instrument, all intermediate indorsers are liable to him.

Illustrations

(a) The indorser of a negotiable instrument signs his name, adding the words "without recourse".

Upon this indorsement he incurs no liability:

(b) A is the payee and holder of a negotiable instrument. Excluding personal liability by an endorsement "without recourse“. he transfers the instrument to B, and B indorses it to C, who indorses it to A. A is not only reinstated in his former rights but has the rights of an indorsee against B and C.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 52 of Negotiable Instruments Act, 1881 :

P. Mohanraj vs M/S. Shah Brothers Ispat Pvt. Ltd. on 1 March, 2021



परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 52 का विवरण :  - परक्राम्य लिखत का पृष्ठांकक, पृष्ठांकन में अभिव्यक्त शब्दों द्वारा, उस पर का अपना स्वयं का दायित्व अपवर्जित कर सकेगा या ऐसे दायित्व को या उस लिखते पर शोध्य रकम को प्राप्त करने के पृष्ठांकिती के अधिकार को किसी विनिर्दिष्ट घटना के घटित होने पर, चाहे ऐसी घटना कभी भी घटित न हो, आश्रित कर सकेगा ।

जहां कि कोई पृष्ठांकक अपने दायित्व को ऐसे अपवर्जित करता है और तत्पश्चात् लिखत का धारक हो जाता है वहाँ सब मध्यवर्ती पृष्ठांकक उसके प्रति दायी होते हैं ।

दृष्टान्त

(क) परक्राम्य लिखत का पृष्ठांकक "दायित्व रहित" ये शब्द जोड़ कर अपना नाम हस्ताक्षरित करता है।

इस पृष्ठांकन के आधार पर वह कोई दायित्व उपगत नहीं करता है।

(ख) क परक्राम्य लिखत का पानेवाला और धारक है। ''दायित्व रहित'' इस पृष्ठांकन द्वारा वैयक्तिक दायित्व को अपवर्जित करके वह लिखत ख को अंतरित करता है और ख, उसे ग को पृष्ठांकित करता है जो उसे क को पृष्ठांकित कर देता है । क न केवल अपने पूर्ववर्ती अधिकारों में ही पुन:स्थापित हो जाता है वरन् उसे ख और ग के विरुद्ध पृष्ठांकिती के अधिकार भी प्राप्त हो जाते हैं ।



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