Section 49 The Army Act, 1950 in Hindi

 

Section 49 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 49 The Army Act, 1950  :Permitting escape of person in custody. Any person subject to this Act who commits any of the

following offences, that is to say,-

(a) when in command of a guard, picquet, patrol or post, releases without proper authority, whether

wilfully or without reasonable excuse, any person committed to his charge, or refuses to receive any

prisoner or person so committed; or

(b) wilfully or without reasonable excuse allows to escape any person who is committed to his charge,

or whom it is his duty to keep or guard; shall, on conviction by court- martial, be liable, if he has acted

wilfully to suffer imprisonment for a term which may extend to fourteen years or such less punishment

as is in this Act mentioned; and if he has not acted wilfully, to suffer imprisonment for a term which

may extend to two years or such less punishment as is in this Act mentioned.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 49 of The Army Act, 1950  :



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 49 का विवरण :  - अभिरक्षा में से किसी व्यक्ति को निकल भागने देना - इस अधिनियम के अध्यधीन का कोई व्यक्ति, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्

(क) उस दौरान, जब वह किसी गारद, पिकेट, पैट्रोल या चौकी का समादेशक है, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उसके भारसाधन में सुपुर्द किया गया है, उचित प्राधिकार के बिना, चाहे जानबूझकर, चाहे युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना, निर्मुक्त करेगा या किसी कैदी या ऐसे सुपुर्द किए गए व्यक्ति को लेने से इंकार करेगा, अथवा

(ख) ऐसे व्यक्ति को, जो उसके भारसाधक में सुपुर्द किया गया है या जिसे रखना या जिस पर पहरा रखना उसका कर्तव्य है जानबूझकर या युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना निकल भागने देगा, सेना-न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर, उस दशा में जिसमें उसने जानबूझकर कार्य किया है कारावास, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा, और उस दशा में जिसमें उसने जानबूझकर कार्य नहीं किया है कारावास, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसा लघुतर दंड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा।



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