Section 34 The Army Act, 1950

 

Section 34 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 34 The Army Act, 1950  :Offences in relation to the enemy and punishable with death. Any person subject to this Act

who commits any of the following offences, that is to say,-

(a) shamefully abandons or delivers up any garrison, fortress, post, place or guard, committed to his

charge, or which

it is his duty to defend, or uses any means to compel or induce any commanding officer or other

person to commit any of the said acts; or

(b) intentionally uses any means to compel or induce any person subject to military, naval or air force

law to abstain from acting against the enemy, or to discourage such person from acting against the

enemy; or

(c) in the presence of the enemy, shamefully casts away his arms, ammunition, tools or equipment or

misbehaves in such manner as to show cowardice; or

(d) treacherously holds correspondence with, or communicates intelligence to, the enemy or any

person in arms against the Union; or

(e) directly or indirectly assists the enemy with money, arms., ammunition, stores or supplies; or

(f) treacherously or through cowardice sends a flag of truce to the enemy; or

(g) in time of war or during any military operation, intentionally occasions a false alarm in action, camp,

garrison or quarters, or spreads reports calculated to create alarm or despondency; or

(h) in time of action leaves his commanding officer or his post, guard, picquet, patrol or party without

being regularly relieved or without leave; or

(i) having been made a prisoner of war, voluntarily serves with or aids the enemy; or

(j) knowingly harbours or protects an enemy not being a prisoner; or

(k) being a sentry in time of war or alarm, sleeps upon his post or is intoxicated; or

(l) knowingly does any act calculated to imperil the success of the military, naval or air forces of India

or any forces co- operating therewith or any part of such forces; shall, on conviction by court- martial,

be liable to suffer death or such less punishment as is in this Act mentioned.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 34 of The Army Act, 1950  :

Ex-Havildar Ratan Singh vs Union Of India And Ors on 19 November, 1991

Union Of India & Ors vs Sunil Kumar Sarkar on 28 February, 2001

Union Of India & Ors vs Vishav Priya Singh on 5 July, 2016

Major E. G. Barsay vs The State Of Bombay on 24 April, 1961

Joginder Singh vs State Of Himachal Pradesh on 30 November, 1970

Union Of India & Ors vs Major General Madan Lal Yadav on 22 March, 1996

Ex. Naik Sardar Singh vs Union Of India And Others on 3 May, 1991

Som Datt Datta vs Union Of India And Ors on 20 September, 1968

Union Of India & Ors vs Dinesh Prasad on 30 October, 2012

Union Of India & Ors vs Bodupalli Gopalaswami on 12 September, 2011



सेना अधिनियम, 1950 की धारा 34  का विवरण :  - शत्रु से संबंधित अपराध, जो मृत्यु से दण्डनीय है - इस अधिनियम के अध्यधीन का कोई भी व्यक्ति जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई भी अपराध करेगा, अर्थात्

(क) किसी गैरिजन, दुर्ग, पदस्थान, स्थान या गारद को, जो उसके भारसाधन में सुपुर्द किया गया है या जिसकी रक्षा करना उसका कर्तव्य है लज्जास्पद रूप से परित्यक्त या समर्पित करेगा या उक्त कार्यों में से कोई कार्य करने के लिए किसी कमान आफिसर या अन्य व्यक्ति को विवश या उत्प्रेरित करने के लिए किन्हीं साधनों का उपयोग करेगा, अथवा

(ख) सेना, नौसेना या वायु सेना विधि के अध्यधीन के किसी भी व्यक्ति को शत्रु के विरुद्ध कार्य करने से प्रविरत रहने के लिए विवश या उपत्प्रेरित करने के लिए या ऐसे व्यक्ति को शत्रु के विरुद्ध कार्य करने से निरुत्साहित करने के लिए किन्हीं साधनों का साशय उपयोग करेगा, अथवा

(ग) शत्रु की उपस्थिति में अपने आयुधों, गोलाबारूद्ध, औजारों या उपस्कर को लज्जास्पद रूप से संत्यक्त करेगा या ऐसी रीति से कदाचार करेगा जिससे कायरता दर्शित हो, अथवा

(घ) विश्वासघातपूर्वक, शत्रु से या किसी ऐसे व्यक्ति से जो संघ के विरुद्ध उद्यतायुध है वार्ताचार करेगा या उसे आसूचना देगा, अथवा

(ङ) धन, आयुध, गोलाबारूद, सामान या प्रदाय से शत्रु की प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः सहायता करेगा, अथवा

(च) विश्वासघातपूर्वक या कायरता से शत्रु को अवहार ध्वज भेजेगा, अथवा

(छ) युद्ध-काल में या किन्हीं सैनिक संक्रियाओं के दौरान कार्रवाई, कैम्प, गैरिजन या क्वार्टरों में मिथ्या एलार्म साश्य कारित करेगा या ऐसी रिपोर्ट जो एलार्म या नैराश्य पैदा करने के लिए प्रकल्पित हो, फैलाएगा, अथवा

(ज) संघर्ष के समय नियमित रूप से अवमुक्त हुए बिना या बिना छुट्टी अपने कमान आफिसर को या अपने पदस्थान से गारद, पिकेट, पैट्रोल, या दल को छोड़ेगा, अथवा

(झ) युद्ध कैदी बनाए जाने पर स्वेच्छा से शत्रु पक्ष में सेवा करेगा या शत्रु की सहायता करेगा, अथवा

(ञ) ऐसे शत्रु को, जो कैदी नहीं है, जानते हुए संश्रय देगा या उसका संरक्षण करेगा, अथवा

(ट) युद्ध या एलार्म के समय सन्तरी होते हुए अपने पदस्थान पर सो जाएगा या नशे में होगा, अथवा

(ठ) जानते हुए कोई ऐसा कार्य करेगा जो भारत के सैनिक, नौसैनिक या वायु सैना बलों की या उनसे सहयोग करने वाले किन्हीं बलों की या ऐसे बलों के किसी भाग की सफलता को संकट में डालने के लिए प्रकल्पित हो, सेना-न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर मृत्यु दण्ड या ऐसा लघुतर दण्ड, जो इस अधिनियम में वर्णित है, भोगने के दायित्व के अधीन होगा।



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