Section 18 Prevention of Corruption Act,1988

 Section 18 Prevention of Corruption Act,1988 in Hindi and English 


Section 18 Prevention of Corruption Act,1988 :If from information received or otherwise, a police officer has reason to suspect the commission of an offence which he is empowered to investigate under section 17 and considers that for the purpose of investigation or inquiry into such offence, it is necessary to inspect any bankers' books, then, notwithstanding anything contained in any law for the time being in force, he may inspect any bankers' books in so far as they relate to the accounts of the persons suspected to have committed that offence or of any other person suspected to be holding money on behalf of such person, and take or cause to be taken certified copies of the relevant entries therefrom, and the bank concerned shall be bound to assist the police officer in the exercise of his powers under this section: Provided that no power under this section in relation to the accounts of any person shall be exercised by a police officer below the rank of a Superintendent of Police, unless he is specially authorised in this behalf by a police officer of or above the rank of a Superintendent of Police. Explanation.-- In this section, the expressions" bank" and" bankers' books" shall have the meanings respectively assigned to them in the Bankers' Books Evidence Act, 1891 (18 of 1891 .). 


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 18 of Prevention of Corruption Act,1988 :

Central Bureau Of Investigation vs V.C. Shukla & Ors on 2 March, 1998

State Of Maharashtra vs Tapas D. Neogy on 16 September, 1999

Manju Surana vs Sunil Arora on 27 March, 2018

Lakhvir Singh Etc. vs The State Of Punjab on 19 January, 2021

The State Of Kerala vs K.Ajith on 28 July, 2021

P.V. Narasimha Rao vs State(Cbi/Spe) on 17 April, 1998

P.V. Narasimha Rao vs State(Cbi/Spe) on 17 April, 1998



 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 18 का विवरण :  - यदि प्राप्त जानकारी द्वारा या अन्यथा किसी पुलिस अधिकारी के पास किसी ऐसे अपराध के कारित होने के संदेह के कारण है, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह धारा 17 के अधीन सशक्त है वह यह जानता है कि ऐसे अपराध का अन्वेषण या जांच करने के प्रयोजनों के लिए किन्हीं बैंककार, बहियों का निरीक्षण किया जाना समीचीन है तो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी वह किन्हीं बैंककार बहियों का वहां तक निरीक्षण कर सकेगा जहां तक कि वे उस व्यक्ति के, जिसके द्वारा अपराध किए जाने का सन्देह है या किसी अन्य व्यक्ति के जिसके द्वारा ऐसे व्यक्ति के लिए धन धारण किए जाने का संदेह है, लेखाओं से संबंधित है, और उसमें से सुसंगत प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतियां ले सकेगा या लेने का निदेश दे सकेगा तथा संबंधित बैंक उस पुलिस अधिकारी की, इस धारा के अधीन उसकी शक्तियों के प्रयोग में सहायता करने के लिए आबद्ध होगा :

परन्तु किसी व्यक्ति की लेखाओं के संबंध में इस धारा के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग पुलिस अधीक्षक से अनिम्न किसी पुलिस अधिकारी द्वारा नहीं किया जाएगा, जब तक कि पुलिस अधीक्षक की पंक्ति या उससे ऊपर के किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त न किया गया हो।

स्पष्टीकरण -- इस उपधारा में ‘‘बैंक” और ‘बैंककार बही” पदों के वे ही अर्थ होंगे जो उन्हें बैंककार बही अधिनियम, 1891 (1891 का 18) में दिए गए हैं।



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