Section 30 The Army Act, 1950


Section 30 The Army Act, 1950 in Hindi and English 

Section 30 The Army Act, 1950  :Immunity of persons attending courts- martial from arrest.

(1) No presiding officer or member of a court- martial, no judge advocate, no party to any proceeding

before a court- martial, or his legal practitioner or agent, and no witness acting in obedience to a

summons to attend a court- martial shall, while proceeding to, attending or returning from, a courtmartial, be liable to arrest under civil or revenue process.

(2) If any such person is arrested under any such process, he may be discharged by order of the

court- martial.

1. Subs. by Act 19 of 1955, s. 2 and sch. for" the Commander- in- Chief".

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 30 of The Army Act, 1950  :

Lt. Col. Prithi Pal Singh Bedi Etc vs Union Of India & Others on 25 August, 1982

सेना अधिनियम, 1950 की धारा 30 का विवरण :  - सेना-न्यायालयों में हाजिर होने वाले व्यक्तियों की गिरफ्तारी से उन्मुक्ति - (1) किसी भी सेना-न्यायालय का पीठासीन आफिसर या सदस्य, कोई भी जज-एडवोकेट, सेना न्यायालय के समक्ष की किसी कार्यवाही का कोई भी पक्षकार, या उनका कोई भी विधि व्यवसायी या अभिकर्ता, और किसी सेना-न्यायालय में हाजिर होने के समन के आज्ञानुवर्तन में कार्य करने वाला कोई भी साक्षी सेना-न्यायालय को जाने, उसमें हाजिर रहने या वहां से लौटने के दौरान सिविल या राजस्व आदेशिका के अधीन गिरफ्तार किए जाने के दायित्व के अधीन न होगा।

(2) यदि ऐसा कोई व्यक्ति ऐसी किसी आदेशिका के अधीन गिरफ्तार किया जाता है तो वह सेना-न्यायालय के आदेश से उन्मोचित किया जा सकेगा।

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