Section 21 The Army Act, 1950

 

Section 21 The Army Act, 1950 in Hindi and English 



Section 21 The Army Act, 1950  :Subject to the provisions of any law for the time being in force relating to the regular Army or to

any branch thereof, the Central Government may, by notification, make rules restricting to such extent

and in such manner as may be necessary the right of any person subject to this Act-

(a) to be a member of, or to be associated in any way with, any trade union or labour union, or any

class of trade or labour unions or any society, institution or association, or any class of societies,

institutions or associations

(b) to attend or address any meeting or to take part in any demonstration organised by any body of

persons for any political or other purposes

(c) to communicate with the press or to publish or cause to be published any book, letter or other

document.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 21 of The Army Act, 1950  :

R. Viswan & Others vs Union Of India & Others on 6 May, 1983

Secr.,Ministry Of Defence vs Babita Puniya on 17 February, 2020

Union Of India vs Ld. Cdr. Annie Nagaraja, on 17 March, 2020

Lt. Col. Prithi Pal Singh Bedi Etc vs Union Of India & Others o

Gopal Upadhyaya And Ors. vs Union Of India (Uoi) And Ors. on 4 December, 1986

Union Of India And Ors vs Major S.P. Sharma And Ors on 6 March, 2014

Ous Kutilingal Achudan Nair And s Union Of India & Ors on 20 November, 1975

Ram Sarup vs The Union Of India And Another on 12 December, 1963

Union Of India And Ors vs Major S.P. Sharma And Ors on 6 March, 1947

Capt. Virendra Kumar vs Union Of India (Uoi) on 22 April, 1980




सेना अधिनियम, 1950 की धारा 21 का विवरण :  - नियमित सेना या उसकी किसी शाखा से सम्बन्धित किसी भी तत्समय प्रवृत्त विधि के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अध्यधीन के अध्यधीन के किसी व्यक्ति के उस अधिकार को जो उसका -

(क) किसी व्यवसाय संघ या श्रमिक संघ के अथवा व्यवसाय या श्रमिक संघों के किसी वर्ग के, अथवा किसी सोसाइटी, संस्था या संगम के अथवा सोसाइटियों, संस्थाओं या संगमों के किसी वर्ग के, सदस्य होने या उससे किसी भी रूप में सहयुक्त होने का है;

(ख) व्यक्तियों के किसी निकाय द्वारा किन्हीं राजनैतिक या अन्य प्रयोजनों के लिए संगठित किसी सभा में हाजिर होने या उसे संबोधित करने अथवा संगठित किसी प्रदर्शन में भाग लेने का है;

(ग) प्रेस से कोई सम्पर्क करने या कोई पुस्तक, पत्र या अन्य दस्तावेज प्रकाशित करने या प्रकाशित कराने का है, इतने विस्तार तक, तथा ऐसी रीति से, जो आवश्यक हो, निर्बन्धित करने वाले नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी।

22. निवृत्ति, निर्मुक्ति या उन्मोचन - किसी व्यक्ति को, जो इस अधिनियम के अध्यधीन है, ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, सेवा से निवृत्त, निर्मुक्त या उन्मोचित किया जा सकेगा।



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