Section 117 Negotiable Instruments Act, 1881

 

Section 117 Negotiable Instruments Act, 1881 in Hindi and English 



Section 117 Negotiable Instruments Act, 1881 :The compensation payable in case of dishonour of a promissory note, bill of exchange or cheque, by any party liable to the holder or any indorsee, shall be determined by the following rules :

(a) the holder is entitled to the amount due upon the instrument, together with the expenses properly incurred in presenting, noting and protesting it;

(b) when the person charged resides at a place different from that at which the instrument was payable, the holder is entitled to receive such sum at the current rate of exchange between the two places:

(c) an indorser who, being liable, has paid the amount due on the same is entitled to the amount so paid with interest at [eighteen per centum] per annum from the date of payment until tender or realisation thereof, together with all expenses caused by the dishonour and payment:

(d) when the person charged and such indorser reside at different places, the indorser is entitled to receive such sum at the current rate of exchange between the two places;

(e) the party entitled to compensation may draw a bill upon the party, liable to compensate him, payable at sight or on demand, for the amount due to him, together with all expenses properly incurred by him. Such bill must be accompanied by the instrument dishonoured and the protest thereof (if any). If such bill is dishonoured, the party dishonouring the same is liable to make compensation thereof in the same manner as in the case of the original bill.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 117 of Negotiable Instruments Act, 1881 :

Canara Bank vs Canara Sales Corporation & Ors on 22 April, 1987



परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 117 का विवरण :  - धारक या किसी पृष्ठांकिती के प्रति दायित्वाधीन किसी भी पक्षकार द्वारा वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चैक का अनादर किए जाने की दशा में देय प्रतिकर निम्नलिखित नियमों द्वारा अवधारित किया जायेगा -

(क) धारक लिखत पर शोध्य रकम, उसे उपस्थापित करने, और टिप्पणित और प्रसाक्ष्यित कराने में उचित तौर पर उपगत व्ययों सहित पाने का हकदार है;

(ख) जब कि भारित व्यक्ति उस स्थान से भिन्न स्थान में रहता है जिसमें कि लिखत देय थी तब धारक ऐसी रकम दोनों स्थानों के बीच विनिमय की चालू दर पर पाने का हकदार है;

(ग) जिस पृष्ठांकक ने दायित्वाधीन होते हुए उस पर शोध्य रकम का संदाय किया है वह ऐसी संदत्त रकम संदाय की तारीख से उसके निविदान या आपन की तारीख तक 'अठारह प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज सहित तथा अनादर और संदाय के कारण हुए सब व्ययों सहित पाने का हकदार है;

(घ) जब कि भारित व्यक्ति और ऐसा पृष्ठांकक विभिन्न स्थानों में निवास करते हैं, तब पृष्ठांकक ऐसी रकम दोनों स्थानों के बीच विनिमय की चालू दर पर पाने का हकदार है;

(ङ) प्रतिकर का हकदार पक्षकार अपने को देय प्रतिकर के दायित्वाधीन पक्षकार पर, दर्शन पर या माँग पर संदेय विनिमय-पत्र अपने द्वारा उचित तौर पर उपगत सब व्ययों सहित अपने को शोध्य रकम के लिए लिख सकेगा । ऐसे विनिमय-पत्र के साथ अनादृत लिखत और उसका प्रसाक्ष्य (यदि कोई हो) होना चाहिए। यदि ऐसा विनिमय-पत्र अनादृत किया जाता है तो उसको अनादर करने वाला पक्षकार उसके लिए प्रतिकर उसी प्रकार से देने के लिए दायित्वाधीन है जैसा कि वह मूल विनिमय-पत्र की दशा में होता है।



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