Section 101 Negotiable Instruments Act, 1881

 

Section 101 Negotiable Instruments Act, 1881 in Hindi and English 



Section 101 Negotiable Instruments Act, 1881 :A protest under section 100 must contain --

(a) either the instrument itself, or a literal transcript of the instrument and of everything written or printed thereupon;

(b) the name of the person for whom and against whom the instrument has been protested ;

(c) a statement that payment or acceptance, or better security, as the case may be, has been demanded of such person by the notary public ; the terms of his answer, if any, or a statement that he gave no answer or that he could not be found ;

(d) when the note or bill has been dishonoured, the place and time of dishonour, and, when better security has been refused, the place and time of refusal ;

(e) the subscription of the notary public making the protest;

(f) in the event of an acceptance for honour or of a payment for honour, the name of the person by whom, of the person for whom, and the manner in which, such acceptance or payment was offered and effected.

[A notary public may make the demand mentioned in clause (c) of this section either in person or by his clerk or, where authorized by agreement or usage, by registered letter.]



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 101 of Negotiable Instruments Act, 1881 :

P. Mohanraj vs M/S. Shah Brothers Ispat Pvt. Ltd. on 1 March, 2021

M/S. Econ Antri Ltd vs M/S. Rom Industries Ltd. & Anr on 26 August, 2013



परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 101 का विवरण :  - धारा 100 के अधीन प्रसाक्ष्य में अन्तर्विष्ट होने चाहिए -

(क) या तो स्वयं लिखत या लिखत की और जिसके ऊपर लिखी या मुद्रित हर बात की अक्षरशः अनुलिपि;

(ख) उस व्यक्ति का नाम जिसके लिए और जिसके विरुद्ध लिखत प्रसाक्ष्यित की गई है;

(ग) यह कथन कि, यथास्थिति, संदाय या प्रतिग्रहण या बेहतर प्रतिभूति की माँग नोटरी पब्लिक द्वारा ऐसे व्यक्ति से की गई है; यदि उस व्यक्ति का कोई उत्तर है तो उसे उत्तर के शब्द या यह कथन कि उसमें कोई उत्तर नहीं दिया था या वह पाया नहीं जा सका;

(घ) जब कि वचन-पत्र या विनिमय-पत्र अनादृत किया गया है तब अनादर का स्थान और समय और जब कि बेहतर प्रतिभूति देने से इंकार किया गया है तब इंकार का स्थान और समय;

(ङ) प्रसाक्ष्य करने वाले नोटरी पब्लिक के हस्ताक्षर;

(च) आदरणार्थ प्रतिग्रहण या आदरणार्थ संदाय की दशा में उस व्यक्ति का नाम, जिसके द्वारा उस व्यक्ति का नाम, जिसके लिए, और वह रीति, जिससे ऐसा प्रतिग्रहण या संदाय प्रस्थापित किया गया था और दिया गया था ।

[नोटरी पब्लिक इस धारा के खण्ड (ग) में वर्णित माँग या तो स्वयं अपने लिपिक द्वारा या, जहाँ कि करार या प्रथा से यह प्राधिकृत है वहाँ रजिस्ट्रीकृत चिट्ठी द्वारा कर सकेगा ।]



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