Section 94 CrPC

 


Section 94 CrPC in Hindi and English


Section 94 of CrPC 1973 :- 94. Search of place suspected to contain stolen property, forged documents, etc. - (1) If a District Magistrate, Sub-divisional Magistrate or Magistrate of the first class, upon information and after such inquiry as he thinks necessary, has reason to believe that any place is used for the deposit or sale of stolen property, or for the deposit, sale or production of any objectionable article to which this section applies, or that any such objectionable article is deposited in any place, he may by warrant authorise any police officer above the rank of a constable


(a) to enter, with such assistance as may be required, such place;

(b) to search the same in the manner specified in the warrant;

(c) to take possession of any property or article therein found which he reasonably suspects to be stolen property or objectionable article to which this section applies; 

(d) to convey such property or article before a Magistrate, or to guard the same on the spot until the offender is taken before a Magistrate, or otherwise to dispose of it in some place of safety;

(e) to take into custody and carry before a Magistrate every person found in such place who appears to have been privy to the deposit, sale or production of any such property or article knowing or having reasonable cause to suspect it to be stolen property or, as the case may be, objectionable article to which this section applies.

(2) The objectionable articles to which this section applies are :

(a) counterfeit coin;

(b) pieces of metal made in contravention of the Metal Tokens Act, 1889 (1 of 1889), or brought into India in contravention of any notification for the time being in force under section 11 of the Customs Act, 1962 (52 of 1962);

(c) counterfeit currency note; counterfeit stamps;

(d) forged documents;

(e) false seals;

(f) obscene objects referred to in section 292 of the Indian Penal Code (45nof 1860);

(g) instruments or materials used for the production of any of the articles mentioned in clauses (a) to (f).



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 94 of Criminal Procedure Code 1973:

Shyamlal Mohanlal vs State Of Gujarat on 14 December, 1964

M. P. Sharma And Others vs Satish Chandra, District on 15 March, 1954

Kishor Kirtilal Mehta & Ors vs Vijay Kirtilal Mehta & Ors on 18 February, 2008

Assistant Collector Of Customs &  vs U.L.R. Malwani And Anr on 16 October, 1968

Ritesh Sinha vs State Of U.P.& Anr on 7 December, 2012

M.P. Sharma And Ors. vs Satish Chandra, District on 15 March, 1954

Commissioner Of Income-Tax, vs Laxmichand Narayandas And Anr. on 13 December, 1961

Rama Rao And Anr. vs Narayan And Anr. on 20 December, 1968

Commissioner Of Income-Tax, vs Laxmichand Narayandas And on 13 December, 1961

V. C. Shukla vs State Through C.B.I on 7 December, 1979



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 94 का विवरण :  -  94. उस स्थान की तलाशी, जिसमें चुराई हुई संपत्ति, कूटरचित दस्तावेज आदि होने का संदेह है -- (1) यदि जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को इत्तिला मिलने पर और ऐसी जांच के पश्चात् जैसी वह आवश्यक समझे, वह विश्वास करने का कारण है कि कोई स्थान चुराई हुई संपत्ति के निक्षेप या विक्रय के लिए या किसी ऐसी आपत्तिजनक वस्तु के, जिसको यह धारा लागू होती है, निक्षेप, विक्रय या उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है, या कोई ऐसी आपत्तिजनक वस्तु किसी स्थान में निक्षिप्त है, तो वह कांस्टेबल की पंक्ति से ऊपर के किसी पुलिस अधिकारी को वारण्ट द्वारा यह प्राधिकार दे सकता है कि वह--

(क) उस स्थान में ऐसी सहायता के साथ, जैसी आवश्यक हो, प्रवेश करे;

(ख) वारण्ट में विनिर्दिष्ट रीति से उसकी तलाशी ले;

(ग) वहाँ पाई गई किसी भी सम्पत्ति या वस्तु को जिसके चुराई हुई संपत्ति या ऐसी आपत्तिजनक वस्तु, जिसको यह धारा लागू होती है, होने का उसे उचित संदेह है, कब्जे में ले; 

(घ) ऐसी संपत्ति या वस्तु को मजिस्ट्रेट के पास ले जाए या अपराधी को मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाने तक उसको उसी स्थान पर पहरे में रखे या अन्यथा उसे किसी सुरक्षित स्थान में रखे;

(ङ) ऐसे स्थान में पाए गए ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को अभिरक्षा में ले और मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाए, जिसके बारे में प्रतीत हो कि वह किसी ऐसी संपत्ति या वस्तु के निक्षेप, विक्रय या उत्पादन में यह जानते हुए या संदेह करने का उचित कारण रखते हुए संसर्गी रहा है कि, यथास्थिति, वह चुराई हुई संपत्ति है या ऐसी आपत्तिजनक वस्तु है, जिसको यह धारा लागू होती है।

(2) वे आपत्तिजनक वस्तुएँ, जिनको यह धारा लागू होती है, निम्नलिखित हैं :

(क) कूटकृत सिक्का;

(ख) धातु टोकन अधिनियम, 1889 (1889 का 1) के उल्लंघन में बनाए गए अथवा सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 के अधीन तत्समय प्रवृत्त किसी अधिसूचना के उल्लघन में भारत में लाए गए धातु खण्ड; 

(ग) कूटकृत करेन्सी नोट; कूटकृत स्टाम्प;

(घ) कूटरचित दस्तावेज;

(ङ) नकली मुद्राएँ;

(च) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 292 में निर्दिष्ट अश्लील वस्तुएँ;

(छ) खण्ड (क) से (च) तक के खण्डों में उल्लिखित वस्तुओं में से किसी के उत्पादन के लिए प्रयुक्तउपकरण या सामग्री।


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