Section 212 CrPC

 Section 212 CrPC in Hindi and English



Section 212 of CrPC 1973 :- 212. Particulars as to time, place and person -

(1) The charge shall contain such particulars as to the time and place of the alleged offence and the person (if any) against whom, or the thing (if any) in respect of which, it was committed, as are reasonably sufficient to give the accused notice of the matter with which he is charged.

(2) When the accused is charged with criminal breach of trust or dishonest misappropriation of money or other moveable property, it shall be sufficient to specify the gross sum or, as the case may be, describe the movable property in respect of which the offence is alleged to have been committed and the dates between which the offence is alleged to have been committed, without specifying particular items or exact dates and the charge so framed shall be deemed to be a charge of one offence within the meaning of section 219 :

Provided that the time included between the first and last of such dates shall not exceed one year.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 212 of Criminal Procedure Code 1973:

Pramatha Nath Taluqdar vs Saroj Ranjan Sarkar on 21 December, 1961

Budhan Choudhry And Other vs The State Of Bihar on 2 December, 1954

Ram Sarup vs The Union Of India And Another on 12 December, 1963

S. K. Kashyap & Anr vs The State Of Rajasthan on 2 March, 1971

Union Of India vs Prafulla Kumar Samal & Anr on 6 November, 1978

Bhupesh Deb Gupta (Dead) By L.Rs vs State Of Tripura on 22 September, 1978

Lt. Col. S.K. Kashyap And Anr. vs The State Of Rajasthan on 2 March, 1971


दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 212 का विवरण :  -  212. समय, स्थान और व्यक्ति के बारे में विशिष्टियाँ --

(1) अभिकथित अपराध के समय और स्थान के बारे में और जिस व्यक्ति के (यदि कोई हो), विरुद्ध अथवा जिस वस्तु के (यदि कोई हो) विषय में वह अपराध किया गया उस व्यक्ति या वस्तु के बारे में ऐसी विशिष्टियाँ, जैसी अभियुक्त को उस बात की, जिसका उस पर आरोप है, सूचना देने के लिए उचित रूप से पर्याप्त है, आरोप में अन्तर्विष्ट होगी।

(2) जब अभियुक्त पर आपराधिक न्यासभंग या बेईमानी से धन या अन्य जंगम संपत्ति के दुर्विनियोग का आरोप है तब इतना ही पर्याप्त होगा कि विशिष्ट मदों का जिनके विषय में अपराध किया जाना अभिकथित है, या अपराध करने की ठीक-ठीक तारीखों का विनिर्देश किए बिना, यथास्थिति, उस सकल राशि का विनिर्देश या उस जंगम संपत्ति का वर्णन कर दिया जाता है जिसके विषय में अपराध किया जाना अभिकथित है, और उन तारीखों का, जिनके बीच में अपराध का किया जाना अभिकथित है, विनिर्दिष्ट कर दिया जाता है और ऐसे विरचित आरोप धारा 219 के अर्थ में एक ही अपराध का आरोप समझा जाएगा :


परन्तु ऐसी तारीखों में से पहली और अंतिम के बीच का समय एक वर्ष से अधिक का न होगा।



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