Section 87 IPC in Hindi

 Section 87 IPC in Hindi and English


Section 87 of IPC 1860:-Act not intended and not known to be likely to cause death or grievous hurt, done by consent -

Nothing which is not intended to cause death, or grievous hurt, and which is not known by the doer to be likely to cause death or grievous hurt, is an offence by reason of any harm which it may cause, or be intended by the doer to cause, to any person, above eighteen years of age, who has given consent, whether express or implied, to suffer that harm; or by reason of any harm which it may be known by the doer to be likely to cause to any such person who has consented to take the risk of that harm.

Illustration -

A and Z agree to fence with each other for amusement. This agreement implies the consent of each to suffer any harm which, in the course of such fencing, may be caused without foul play; and if A, while playing fairly, hurts Z, A commits no offence. 


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 87 of Indian Penal Code 1860:

Natthu And Ors. vs State Of Uttar Pradesh on 11 August, 1977

K.Ashoka vs N.L.Chandrashekar & Ors on 15 April, 2009

Bhushan Kumar & Anr vs State(Nct Of Delhi) & Anr on 4 April, 2012

Bajwa & Ors vs State Of U.P on 6 March, 1973

Baladin And Ors. vs State Of Uttar Pradesh on 18 October, 1955

Somappa Vamanappa Madar And ... vs State Of Mysore on 24 April, 1979

P.B.Desai vs State Of Maharashtra & Anr on 13 September, 2013

State Of Karnataka vs Prakash on 30 August, 2018


आईपीसी, 1860 (भारतीय दंड संहिता) की धारा 87 का विवरण सम्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी सम्भाव्यता का ज्ञान हो -

कोई बात, जो मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के आशय से न की गई हो और जिसके बारे में कर्ता को यह ज्ञात न हो कि उससे मृत्यु या घोर उपहति कारित होना संभाव्य है, किसी ऐसी अपहानि के कारण अपराध नहीं है जो उस बात से अठारह वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को, जिसने वह अपहानि सहन करने की चाहे अभिव्यक्त चाहे विवक्षित सम्मति दे दी हो, कारित हो या कारित होना कर्ता द्वारा आशयित हो अथवा जिसके बारे में कर्ता को ज्ञात हो कि वह उपर्युक्त जैसे किसी व्यक्ति को, जिसने उस अपहानि की जोखिम उठाने की सम्मति दे दी है, उस बात द्वारा कारित होनी संभाव्य है

दृष्टांत -

क और य आमोदार्थ आपस में पटेबाजी करने को सहमत होते हैं। इस सहमति में किसी अपहानि को, जो ऐसी पटेबाजी में खेल के नियम के विरुद्ध न होते हुए कारित हो, उठाने की हर एक की सम्मति विवक्षित है, और यदि के यथानियम पटेबाजी करते हुए य को उपहति कारित कर देता है, तो क कोई अपराध नहीं करता है।


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