Section 171C IPC in Hindi

 Section 171C IPC in Hindi and English


Section 171C of IPC 1860:- Undue influence at elections -

(1) Whoever voluntarily interferes or attempts to interfere with the free exercise of any electoral right commits the offence of undue influence at an election.

(2) Without prejudice to the generality of the provisions of sub-section (1), whoever

(a) threatens any candidate or voter, or any person in whom a candidate or voter is interested, with injury of any kind, or

(b) induces or attempts to induce a candidate or voter to believe that he or any person in whom he is interested will become or will be rendered an object of

Divine displeasure or of spiritual censure, shall be deemed to interfere with the free exercise of the electoral right of such candidate or voter, within the meaning of sub-section (1).

(3) A declaration of public policy or a promise of public action, or the mere exercise of a legal right without intent to interfere with an electoral right, shall not be deemed to be interference within the meaning of this section.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 171C of Indian Penal Code 1860:

Shiv Kirpal Singh vs Shri V. V. Giri on 14 September, 1970

Krishnamoorthy vs Sivakumar & Ors on 21 January, 2015

Charan Lal Sahu & Others vs Giani Zail Singh & Another on 13 December, 1983

Mithilesh Kumar Sinha & Anr vs Returning Officer For on 17 September, 1992

Shri Baburao Patel & Ors vs Dr. Zakir Husain & Ors on 7 November, 1967

Bhagwati Prasad Dixit vs Rajeev Gandhi on 25 April, 1986

M.J. Zakharia Sait vs T.M. Mohammed And Ors on 25 April, 1990



आईपीसी, 1860 (भारतीय दंड संहिता) की धारा 171ग का विवरण -  निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना -

(1) जो कोई किसी निर्वाचन अधिकार के निर्बाध प्रयोग में स्वेच्छया हस्तक्षेप करता है या हस्तक्षेप करने का प्रयत्न करता है, वह निर्वाचन में असम्यक् असर डालने का अपराध करता है। 

(2) उपधारा (1) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जो कोई -

(क) किसी अभ्यर्थी या मतदाता को, या किसी ऐसे व्यक्ति को जिससे अभ्यर्थी या मतदाता हितबद्ध है, किसी प्रकार की क्षति करने की धमकी देता है, अथवा

(ख) किसी अभ्यर्थी या मतदाता को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करता है या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करता है कि वह या कोई ऐसा व्यक्ति, जिससे वह हितबद्ध है, दैवीय अप्रसाद या आध्यात्मिक परिनिन्दा का भाजन हो जाएगा, या बना दिया जाएगा,

यह समझा जाएगा कि वह उपधारा (1) के अर्थ के अन्तर्गत ऐसे अभ्यर्थी या मतदाता के निर्वाचन अधिकार के निर्बाध प्रयोग में हस्तक्षेप करता है।

(3) लोकनीति की घोषणा या लोक कार्यवाही का वचन या किसी वैध अधिकार का प्रयोग मात्र, जो किसी निर्वाचन अधिकार में हस्तक्षेप करने के आशय के बिना है, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत हस्तक्षेप करना नहीं समझा जाएगा।


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