Section 113 IPC in Hindi

 Section 113 IPC in Hindi and English



Section 113 of IPC 1860:- Liability of abettor for an effect caused by the act abetted different from that intended by the abettor —

When an act is abetted with the intention on the part of the abettor of causing a particular effect, and an act for which the abettor is liable in consequence of the abetment, causes a different effect from that intended by the abettor, the abettor is liable for the effect caused, in the same manner and to the same extent as if he had abetted the act with the intention of causing that effect, provided he knew that the act abetted was likely to cause that effect.

Illustration -

A instigates B to cause grievous hurt to Z. B, in consequence of the instigation, causes grievous hurt to Z. Z dies in consequence. Here, if A knew that the grievous hurt abetted was likely to cause death, A is liable to be punished with the punishment provided for murder.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 113 of Indian Penal Code 1860: 

Kashmira Devi vs The State Of Uttarakhand on 28 January, 2020

Noorul Huda Maqbool Ahmed vs Ram Deo Tyagi And Others on 4 July, 2011

Jagdish Chand vs State Of Haryana on 7 January, 2019


आईपीसी, 1860 (भारतीय दंड संहिता) की धारा 113 का विवरण - दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो -

जबकि कार्य का दुष्प्रेरण दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन है, वह कार्य दुष्प्रेरक के द्वारा आशयित प्रभाव से भिन्न प्रभाव कारित करता है तब दुष्प्रेरक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया हो परन्तु यह तब जबकि वह यह जानता था कि दुष्प्रेरित कार्य से यह प्रभाव कारित होना संभाव्य है। 

दृष्टांत -

य को घोर उपहति करने के लिए ख को क उकसाता है। ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप य को घोर उपहति कारित करता है। परिणामतः य की मृत्यु हो जाती है। यहां, यदि क यह जानता था कि दुष्प्रेरित घोर उपहति से मृत्यु कारित होना संभाव्य है, तो क हत्या के लिए उपबंधित दण्ड से दण्डनीय है।



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