Plaint or Pleading related Questions and Answers in Hindi

Plaint or Pleading related Questions and Answers in Hindi | Civil Procedure Code related questions on plaint and Pleadings
मुकदमे का कालचक: अभीवचन या (प्लीडिंग) 

प्रश्न :- कोई दीवानी मुकदमा कैसे प्रारंभ होता है |
उत्तर :- दीवानी मुकदमा न्यायालय मे वाद पत्र प्रस्तुत होने के बाद शुरू होता है | यह या तो व्यक्तिगत रूप से किया जा सकता है अथवा किसी वकील या फिर किसी अधिकृत एजेंट द्वारा किया जा सकता है |

प्रश्न  :- प्लीडिंग (अभिवचन) किसे कहते हैं ? 
उत्तर :- अभी वचन का तात्पर्य मुख्यतः वाद पत्र या लिखित जवाब होता है | यह काम व्यक्ति स्वयं या अपने वकील के द्वारा या किसी मनोनीत एजेंट के द्वारा भी करा सकता है |

प्रश्न  :- प्लीडिंग (अभिवचन) वचन में क्या लिखना चाहिए ? 
उत्तर :- (क) किसी अभिवचन में उन सभी सार मुक्त तथ्यों को लिखना चाहिए जिसके ऊपर वादी मुकदमे का आधार बनता है | इसमें सबूत पेश करने की जरूरत नहीं होती है |
दीवानी प्रक्रिया संहिता तथा में जो बिल्डिंग (अभिवचन) होते हैं | यह याचिका या काउंटर एफिडेविट की प्लीडिंग से भिन्न होती है | दीवानी प्रक्रिया में केवल तथ्यों की जरूरत होती है जबकि याचिकाओं तथा काउंटर एफिडेविट में तथ्यों के साथ सबूत भी संगलन किए जाते हैं | वादी यदि सबूत संगलन नहीं करता है तो आगे की कार्यवाही में वह उन सबूतों पर निर्भर नहीं रह सकता है |
(ख) यदि किसी पक्ष के साथ कोई बेईमानी धोखाधड़ी अपर्थाथ रूप प्रस्तुत किया हो या अनुसूचित प्रभाव हो तो पक्ष अपने अभी वचन में इसका जिक्र कर सकते हैं |
(ग) अभी वचन के ऊपर पार्टी के या उसके वकील के हस्ताक्षर होने चाहिए यदि ऐसा नहीं होता है तो किसी भी अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर होने चाहिए |
(घ) हर प्लीडिंग में पता देना जरूरी है|
(ड) प्लीडिंग को सत्यापित करना जरूरी है | यह पार्टी सॉन्ग या उसका वकील या कोई अन्य व्यक्ति जिसे मुकदमे के तथ्यों का ज्ञान हो वह कर सकता है (आर्डर 6) 

प्रश्न :- प्लेट में क्या-क्या लिखना चाहिए
उत्तर :- प्लेट में निम्नलिखित बातें लिखनी चाहिए |
(क) उच्च न्यायालय का नाम जहां पर मुकदमा डाला हो |
(ख) प्रतिवादी का नाम रिहाइश का पता
(ग) वादी का नाम पुलिया रिहाइश का पता और जहां पर पक्ष नाबालिक हो या पागल हो तो इस बात का वक्तव्य
(घ) वाद के कारण थे जब वाद उत्पन्न हुआ था
(ड) न्यायालय के क्षेत्र का अधिकार से संबंधित तथ्य
(च) वादी के जो राहत न्यायालय से चाहता हो
(छ) वादी अपने दावे के जिस भाग को छोड़ना चाहता हो उससे संबंधित तथ्य
(ज) मुकदमे के विषय से संबंधित मूल्य का तत्व या फिर न्यायालय के क्षेत्राधिकार से संबंधित कोर्ट फीस का तथ्य
(झ) वादी के द्वारा मांगी हुई राहत
(ण) यदि वादी ने कई राहत मांगी है तो वह बिल्कुल साफ शब्दों में होना चाहिए |

प्रश्न :- क्या बात पत्र का कोई प्रारूप है ? 
उत्तर :- (क) इसका कोई प्रारूप निर्धारित नहीं है |
(ख) यद्यपि यह जरूरी है कि वाद पत्र को विभिन्न परिच्छेदों दो में बॅटा होना चाहिए |
(ग) तथ्यों को संक्षिप्त में वर्णित किया जाना चाहिए |
(घ) वाद पत्र में विधि संबंधित समस्याओं को वर्णित करने की आवश्यकता नहीं है |

प्रश्न :- वाद पत्र के उत्तर को क्या कहा जाता है ? 
उत्तर :- लिखित जवाब |

प्रश्न  :-  लिखित जवाब के प्रतिरूपण के लिए क्या है? 
उत्तर :- प्रतिवादी को अपने लिखित जवाब में वाद पत्र के प्रत्येक आरोपों का उत्तर अवश्य देना चाहिए और उसे यह लिखना चाहिए कि क्या वह इन्हें मान रहा है अथवा इंकार कर रहा है |
जहां प्रतिवादी किसी आरोप को विशिष्ट रूप से इनकार नहीं करता है तो न्यायालय को यह अधिकार है कि वह यह निर्णय ले ले कि प्रतिवादी ने उस आरोप को एक प्रकार से स्वीकृत कर लिया है | दूसरे शब्दों में चुप रहने पर भी एक प्रकार की परोक्ष स्वीकृति समझी जाती है |
दृष्टांत :
1)  समान बिक्री संविदा को तोड़ने के लिए अ न ब के ऊपर मुकदमा दायर किया | अ का कहना है कि ब द्वारा जो समान नेशनल आपूर्ति किया गया है वह करार में दिखाए गए कानून से नहीं मिलता | ब अपने लिखित जवाब में इस विषय में कौन रहता है | वह ना तो इसे स्वीकार करता है और ना ही इसको इंकारी की करता  है | यह अदालत को अधिकार है कि वह इसको घोषित करें कि ब ने अपने विरुद्ध दायर की गई शिकायत मान ली है |

प्रश्न :- वादी के द्वारा किसी आरोप को इनकार करने के लिए उचित तरीका क्या है ? 
उत्तर :- इंकार यदि करना हो तो वह विशेषीकृत होना चाहिए तथा उसे कपट पूर्वक नहीं होना चाहिए |
दृष्टांत :
1) वाद पत्र में वादी इस बार जिक्र करता है कि प्रतिवाद ने 1 सितंबर 1986 और 2 सितंबर 1986 को पानी में रुकावट पैदा करके कुछ जल मार्गों के उपयोग से उसे वंचित किया है | यदि प्रतिवादी केवल इतना भर कहता है कि वह आरोपी को इनकार करता है तब उसका यह इनका सुस्परूट नहीं है| प्रतिवादी से यह कहने की आशा की जाती है कि अपने वादी को पानी के लिए अधिकार से वंचित नहीं किया गया है | ना तो वाद पत्र में उल्लिखित तिथि विशेष से और ना ही अन्य किसी तरीके से ही |
2) प्रतिवादी द्वारा व्यापार चिन्ह के उल्लंघन के फल स्वरुप हुए नुकसान के मुकदमे में, वादी जो एक महिला है, बयान देती है कि यह किसी व्यापार विशेष से संबंध ट्रेडमार्क की जन्म दायी उपभोग करता है और वह इसे संपूर्ण भारत वर्ष में 1975 से इस्तेमाल करती चली आ रही है | प्रतिवादी ने मात्र इतना ही कह कर आरोप का खंडन किया है कि वह इसका इनकार करता है | यह पर्याप्त नहीं है | प्रतिवादी को यह बयान करना चाहिए कि वह इस पाद से इंकार करता है कि वादी सन 1975 से इस तथाकथित व्यापार चिन्ह का, किसी अन्य तिथि विशेष से उपयोग करा रही है |

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