मंत्रिमंडलीय समितियां

मंत्रिमंडलीय समितियां
मंत्रिमंडल अपना कार्य विभिन्न समितियों के माध्यम से करता है यह भारत के केंद्रीय प्रशासन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इसमें कैबिनेट स्तर के मंत्री होते हैं भारत में मंत्रिमंडल नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित बातें उल्लेखनीय है यह समितियां संविधान उल्लिखित नहीं है तथापि इनकी स्थापना हेतु कार्य संचालन संबंधी नियमावली का प्रावधान है

मंत्रिमंडल समितियों का गठन प्रधानमंत्री द्वारा समय और परिस्थिति की अपेक्षाओं के अनुसार किया जाता है इसलिए इनकी संख्या इनके नाम और इसकी संरचना समय-समय पर बदलती रहती है

मंत्रिमंडल समितियां दो प्रकार की होती हैं स्थाई समिति और तदर्थ समिति स्थाई समिति की प्रकृति नाम अनुरूप होती है जबकि तदर्थ समिति की प्रकृति अस्थाई होती है

तदर्थ समितियों का गठन विशेष समस्याओं से निपटने के लिए समय-समय पर किया जाता है कार्य की समाप्ति पर इनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है जैसे 1962 में चीनी आक्रमण के समय आपातकालीन समिति

प्रधानमंत्री द्वारा समय और परिस्थिति की अपेक्षाओं के अनुसार मंत्रिमंडल समितियों का गठन किया है मंत्रिमंडल समितियों में सदस्यों की संख्या 3 से 8 तक होती है इनमें प्राय कैबिनेट स्तर के मंत्री होते हैं

मंत्रिमंडल समितियों में केवल संबंध विषय से संबंधित प्रभारी मंत्री ही शामिल नहीं होते बल्कि अन्य वरिष्ठ मंत्री भी इसमें होते हैं

मंत्रिमंडल समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है किंतु कभी-कभी गृह मंत्री और वित्त मंत्री भी इन समितियों की अध्यक्षता करते हैं किंतु प्रधानमंत्री यदि समिति का सदस्य है तो उसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री स्वयं करता है

मंत्रिमंडल समितियां केवल मामलों का निपटारा ही नहीं करते बल्कि मंत्रिमंडल के विचार आर्थ प्रस्ताव भी तैयार करती है निर्णय भी लेती है तथापि मंत्रीमंडल इन समितियों द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा भी कर सकता है

मंत्रिमंडल समितियां मंत्रिमंडल के कार्य भार को कम करने संबंधी संगठित तंत्र भी है

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