शासन की राष्ट्रपति प्रणाली

शासन की राष्ट्रपति प्रणाली

भारत का संविधान राष्ट्रपति के पद का सृजन करता है किंतु शासन की प्रणाली राष्ट्रपति या नहीं है । शासन की राष्ट्रपति और संसदीय प्रणाली को समझना चाहिए और उन में क्या अंतर है यह ध्यान में रखना चाहिए । राष्ट्रपति प्रणाली के मुख्य लक्षण इस प्रकार है - 

1. राष्ट्रपति राज्य का अध्यक्ष होता है और साथ ही शासन अध्यक्ष भी। वह राज्य व्यवस्था में स्वस्थ होता है और राष्ट्र के जीवन में भी । वह वास्तव में कार्यपालक होता है नाममात्र का नहीं । उसमें जो शक्तियां निहित है उसका वह व्यवहार में और वास्तव में उपयोग करता है ।

2. सभी कार्यपालिका शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होती हैं । राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त मंत्रिमंडल उसे केवल सलाह देता है । यह आवश्यक नहीं है कि वह उनकी सलाह माने । वह उनकी सलाह लेकर अपने विवेक के अनुसार कार्य कर सकता है ।

3. राष्ट्रपति जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है । राष्ट्रपति के पद की अवधि विधानमंडल की इच्छा पर आश्रित नहीं है । विधान मंडल न तो राष्ट्रपति का निर्वाचन करता है और न उसे उसके पद से हटा सकता है ।

4. राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के सदस्य, विधान मंडल के सदस्य नहीं होते ।  राष्ट्रपति विधानमंडल की अवधि के अवसान के पूर्व उसका विघटन नहीं कर सकता । विधानमंडल राष्ट्रपति की अवधि को महाभियोग द्वारा ही समाप्त कर सकता है अन्यथा नहीं । इस प्रकार राष्ट्रपति और विधानमंडल नियत अवधि के लिए निर्वाचित होते हैं और एक दूसरे से स्वतंत्र होते हैं । एक का दूसरे में हस्तक्षेप नहीं होता ।

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